मोसाद के निशान पर ईरान के टॉप अधिकारी
आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानि IRGC के प्रमुख ब्रिगेडियर-जनरल अमीर अली हाजीजादेह ने इजरायल पर 400 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का आदेश दिया था। इसके अलावा आरोप है कि उन्होंने इससे पहले भी कई बार इजरायल को गंभीर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। पिछले साल अक्टूबर में हुए हमले के बाद इजरायल और अमेरिका के कई अधिकारियों ने तेहरान में एक ऑपरेशन के जरिए हाजीजादेह को मारने पर चर्चा की थी। उस वक्त कई ऐसे रिपोर्ट्स आए थे, जिनमें हाजीजादेह को मारने का दावा किया गया था, जो गलत निकला। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस वक्त इजरायली और अमेरिकी अधिकारी, हाजीजादेह को मारने में नाकाम हो गये थे। हालांकि अक्टूबर हमले के बाद जवाही कार्रवाई करते हुए यरुशलम ने ईरानी एयर डिफेंस और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन क्षमताओं को नष्ट कर दिया था, लेकिन इस बार इजरायल हर हाल में ईरानी परमाणु प्लांट्स पर हमला करना चाहता है।
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के अध्यक्ष डेविड अलब्राइट ने पोस्ट को बताया है कि इजरायली अधिकारी अभी भी इस बात की उम्मीद कर रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ सख्त परमाणु समझौता करे, ताकि इस्लामिक देश के लिए परमाणु बम बनाने के सभी रास्ते बंद हो जाएं। इजरायल को उम्मीद है कि वो ट्रंप को अभी भी ऐसे समझौते के लिए राजी कर सकते हैं। अलब्राइट के मुताबिक “सालों में पहली बार अधिकतम दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है और ईरान के खिलाफ उस प्रेशर को और बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, सैन्य विकल्प भी संभव है। ईरानी शासन अपने पतन की संभावना का सामना कर रहा है।”
अलब्राइट ने कहा कि “यदि ईरानी शासन इन रियायतों को देने से इनकार करता है, तो प्रमुख परमाणु परिसंपत्तियों और क्षमताओं, और शायद कुछ नेताओं को निशाना बनाकर नष्ट करना समझदारी है। इसके अलावा ईरान के आर्थिक लक्ष्यों और शासन के नेतृत्व पर भी विनाशकारी हमले की धमकी दी जा सकती है, अगर वो परमाणु बम बनाने की अपनी जिद से पिछे नहीं हटते हैं।” इजरायल के अंदर नीति निर्धारकों के बीच इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि क्या होगा अगर ट्रंप ईरान के साथ 2015 वाला ही JCPOA समझौता करते हैं? या फिर ईरान, परमाणु बम पर आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं होता है? कई और एक्सपर्ट्स ने ट्रंप की इस बात के लिए आलोचना की है कि वो ईरान के साथ 2015 जैसा ही समझौता करके इस्लामिक शासन को और मजबूत कर रहे है।

