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Rekha Gupta News Today: दिल्ली की नई सीएम रेखा गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल सरकार की फरिश्ते योजना को बंद कर दिया है. सीएम ने इस स्कीम में कई खामियों का हवाला दिया, जिससे राजनीति गरमा गई है. AAP ने इसे अमानवीय ब…और पढ़ें
रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ा फैसला लिया. (AFP)
Rekha Gupta News Today: सीएम रेखा गुप्ता जबसे दिल्ली की गद्दी पर बैठी हैं, धड़ाधड़ फैसले ले रही हैं. अब उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे दिल्ली की राजनीति में उबाल आ गया है. रेखा गुप्ता सरकार ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की फरिश्ते स्कीम को खत्म कर दिया है. इस स्कीम के तहत किसी भी एक्सिडेंट विक्टिम को तुरंत नजदीकी प्राइवेट अस्पताल में ले जाया जा सकता था. इलाज का सारा खर्च दिल्ली सरकार उठाती थी. इस स्कीम से दिल्ली में हजारों लोगों को फायदा भी हुआ. दिल्ली की नई बीजेपी सरकार को इस स्कीम में कई खामिया नजर आई, जिसके चलते इसे बंद कर दिया गया है. इसे लेकर अब राजनीति भी गरमा गई है.
आम आदमी पार्टी के दिल्ली के संयोजक सौरभ भारद्वाज ने फरिश्ते योजना को खत्म करने के लिए भाजपा सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि इस योजना ने सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 10,000 लोगों की जान बचाई थी. भारद्वाज ने आरोप लगाया कि 2023 में जब भाजपा विपक्ष में थी, उसने एलजी कार्यालय के माध्यम से इस योजना को रोकने की कोशिश की थी. इसके लिए धन रोक दिया गया और सत्ता में आने के बाद इसे खत्म कर दिया गया. महत्वपूर्ण जीवन रक्षक पहल को खत्म करना अमानवीय सोच को दिखाता है.
बीजेपी का AAP को जवाब
उधर, दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने AAP पर पलटवार करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल द्वारा लागू की गई सभी योजनाएं घोटाले का जरिया बन गई हैं और फरिश्ते योजना ने उनके विश्वस्तरीय स्वास्थ्य मॉडल के दावों को खोखला साबित कर दिया है. साल 2017 में शुरू की गई इस योजना के तहत निजी अस्पतालों में दुर्घटना पीड़ितों के इलाज का सारा खर्च उठाया गया, जिससे लोग वित्तीय बोझ के डर के बिना उनकी मदद कर सकें.
क्यों शुरू की गई थी फरिश्ते योजना?
कुछ साल पहले दिल्ली में एक दुर्घटना हुई थी. पीड़ित को दिल्ली सरकार के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज नहीं मिला. फिर उसे दूसरे अस्पताल में भी इलाज नहीं मिला और अंततः उसे केंद्र सरकार के अस्पताल ले जाया गया, जहां भी इलाज नहीं हुआ और उसकी मृत्यु हो गई. इस घटना को मीडिया ने कवर किया और हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने कई निर्देश दिए. इस विफलता को दूर करने के लिए फरिश्ते योजना शुरू की गई थी. लेकिन अब दिल्ली की भाजपा सरकार ने इसे बंद कर दिया है, जिससे दुर्घटना पीड़ितों को निजी अस्पतालों में तत्काल और मुफ्त इलाज नहीं मिलेगा और हर साल हजारों लोगों की जान जाएगी.

