अमेरिका बनेगा यूक्रेन का मालिक
ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित शर्तों में अमेरिका को कई अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत वॉशिंगटन यूक्रेन को यूरोप या चीन को अपना संसाधन बेचने से भी रोक सकता है। अटलांटिक काउंसिल के ऊर्जा कानून विशेषज्ञ एलन रिले ने कहा, ‘यह एक अधिग्रहण दस्तावेज है। इसमें कोई गारंटी नहीं है, कोई रक्षा खंड नहीं है। अमेरिका का कुछ भी नहीं लगा है। अमेरिकी पीछे हट सकते हैं, यूक्रेनियन नहीं।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा।’
अमेरिका को मिलेगी सारी रॉयल्टी
नए समझौते के तहत जब तक कीव 100 अरब डॉलर के कर्ज को 4 प्रतिशत ब्याज के साथ चुका नहीं देता, तब तक अमेरिका को यूक्रेन की परिसंपत्तियों से मिलने वाली सभी रॉयल्टी हासिल होगी। उसके बाद कीव को केवल 50 प्रतिशत रॉयल्टी दी जाएगी। बदले में यूक्रेन को रूसी आक्रमण से सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं दी जाएगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ट्रंप का वार्ताकार क्रेमलिन से जुड़े लोगों के साथ नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलान के फिर से शुरू करने पर चर्चा कर रहे थे।
वॉशिंगटन का फुल कंट्रोल
नए प्रस्तावों के तहत, यूक्रेन की सभी खनिज और ऊर्जा परिसंपत्तियां और संबंधित बुनियादी ढांचे, जैसे कि बंदरगाह, रेलवे, सड़क और उत्पादन सुविधाएं- डेलावेयर में स्थित एक अमेरिका-यूक्रेन पुनर्निर्माण निवेश कोष के नियंत्रण में रखी जाएंगी। नए कोष के पांच बोर्ड सदस्यों में से तीन का चयन अमेरिका करेगा, जिससे वॉशिंगटन को किसी भी तीसरे पक्ष को संसाधन बिक्री पर पूर्ण वीटो शक्ति प्राप्त होगी।
मुआवजे के लिए यूक्रेन होगा जिम्मेदार
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वॉशिंगटन को सभी बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक संसाधन परियोजनाओं में निवेश पर पहले प्रस्ताव का अधिकार प्राप्त होगा। वहीं, यूक्रेन को फंड के रोजाना के प्रबंधन में हस्तक्षेप से रोका जाएगा। फाइटनेंशियल टाइम्स के अनुसार, फंडे से होने वाले मुनाफे को सीधे विदेशी मुद्रा में परिवर्तित किया जाएगा और देरी या विवाद की स्थिति में यूक्रेन को मुआवजे के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा। तीन यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया है कि अगले सप्ताह तक सौदे पर हस्ताक्षर होने की संभावना नहीं है। एक ने नए अमेरिकी मसौदा प्रस्ताव को अनुचित करार दिया, जबकि दूसरे ने इसे डकैती बताया है।

