गाजियाबाद का हाल सुधरा
गाजियाबाद के प्रदूषण स्तर में पिछले सालों की तुलना में सुधार हुआ है। इसके पीछे कुछ प्राकृतिक कारण हैं तो कुछ विभागों का प्रयास से हुआ है। पलकिया फाउंडेशन की निदेशक महिमा बंसल का कहना है कि आईक्यू एयर के आंकड़े बता रहे हैं कि भारत में वायु प्रदूषण पर धीरे ही सही पर कार्रवाई हो रही है।
मसलन, सरकारों ने एयर पॉल्यूशन मॉनिटरिंग की व्यवस्था पर काम किया है। अब प्रदूषण की बहस सिर्फ दिल्ली केंद्रित रही है, दूसरे शहरों में भी वायु प्रदूषण गंभीर चुनौती बनी हुई है। बतौर नागरिक संगठन हमलोग कहते आ रहे हैं कि वायु प्रदूषण किसी एक राज्य की समस्या नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सामंजस्य बनाकर काम करने की जरूरत है।
2070 तक भारत के नेट-जीरो के लक्ष्य को पाने के लिए हमें हरेक क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन कम करने की जरूरत है। इस दिशा में बीते वर्षों में सरकारों ने ईवी वाहनों पर सब्सिडी देने की शुरुआत की है, पीएम सूर्य घर योजना, पीएम-कुसुम योजना के भी लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि सकारात्मक कदम है। भारत अपने अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहा है और धीरे-धीरे कोयला आधारित समुदायों को वैकल्पिक रोजगार के साधन करवा रहा है। इन सभी संयुक्त प्रयासों से आने वाले भविष्य में वायु प्रदूषण पर असर पड़ेगा।
कुछ प्रयास से अच्छे हुए हालात
यूपीपीसीबी के रीजनल ऑफिसर विकास मिश्र की मानें तो गाजियाबाद में टूटी सड़क से उड़ने वाली धूल को कम किया गया। इसके अलावा जाम की समस्या को काफी हद तक सुधारने का प्रयास हुआ। पिछले कुछ समय से चल रहे बड़े निर्माण भी पूरे हो गए। इस बार पराली का प्रभाव भी कम देखने को मिला है। पूरे सालों में इस बार बहुत खराब की श्रेणी में जिले का प्रदूषण स्तर पिछले सालों की तुलना में कम रहा है। पीएम-2.5 के स्तर में भी गिरावट दर्ज की गई।

