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Delhi News: दिल्ली के आशिता चांडक को ब्रेन स्ट्रोक आया, जिसके बाद उनके ब्रेन को डेड घोषित किया गया. आठवें महीने में सिजेरियन तरीके से वेंटीलेटर पर रहते हुए महिला ने बच्ची को जन्म दिया. फिर ससुर जी ने ऐसा फैसला…और पढ़ें
महिला का पूरा परिवार सदमे में है. (Representational Picture)
Delhi News: दिल्ली के रहने वाले एक परिवार में उस वक्त खुशी की लहर दौड़ गई जब शादी के छह साल बाद बहू प्रेग्नेंट हो गई. हर किसी को घर में बच्चे की किलकारी सुनने का बड़ा चाव था. हर कोई बहू की खूब सेवा भी कर रहा था. उसे खाने के लिए काजू-बादाम से लेकर हर सुख सुविधाएं दी जा रही थी. इसी बीच आठवें महीने में उनकी यह खुशी मातम में बदल गई. बहू की अचानक तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर ने कहा कि उसका ब्रेन डेड हो चुका है. अब यह महिला नहीं बच सकती. परिवार के पैरों-तले जमीन निकल गई. जैसे-तैसे आठवें महीने में ही ऑपरेशन से बच्ची को बाहर निकाल लिया गया. इसके बाद ससुर जी ने बड़ा दिल दिखाया.
जानकारी के मुताबिक 38 वर्षीय आशिता चांडक को 7 फरवरी को ब्रेन स्ट्रोक आया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें गंभीर ब्रेन डैमेज के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए पेट में पल रही आठ महीने की बच्ची को समय से पहले सिजेरियन डिलीवरी के जरिए महिला को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखते हुए बाहर निकाला गया. बच्ची तो बच गई. अब परिवार वाले चाहते थे कि उसकी मां भी ठीक हो जाए. 13 फरवरी तक डॉक्टरों ने आशिता को बचाने का पूरा प्रयास किया लेकिन इसके बाद उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए. परिवार को बताया गया कि बहू के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है.
गम में डूबे ससुर जी ने मान ली डॉक्टर की गुजारिश
डॉक्टरों ने आशिता का ब्रेन डेड घोषित कर दिया. एक तरफ घर में किलकारी घूंजने की खुशी और दूसरी तरफ बहू की मौत का मातम. परिवार को सदमे में था. इसी बीच डॉक्टरों ने इस परिवार से संपर्क किया और पूछा कि क्या आप बहू के अंगदान करना चाहेंगे. ऐसा करने से अन्य लोगों की जान को भविष्य में बचाया जा सकता है. परिवार वाले इससे सहमत हो गए. इसके बाद मेडिकल टीम ने प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं के लिए दोनों किडनी, लिवर और कॉर्निया निकाल लिए.
मां को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख बच्ची को बचाया गया
आशिता एक निजी फर्म में कस्टमर सपोर्ट मैनेजर के रूप में काम करती है. टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार आशिता के ससुर राजेश रामपाल ने बताया कि 7 फरवरी को बहू को ब्रेन स्ट्रोक हुआ. डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा और तत्काल सिजेरियन सेक्शन की सलाह दी. उसी दिन बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की भी जरूरत थी. उनका बेटा राजुल रामपाल एक कंपनी में बिजनेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव है. शादी के छह साल बाद यह बहू की पहली गर्भावस्था थी.
क्या कहता है कानून?
कानून के अनुसार विशेषज्ञों की एक टीम किसी व्यक्ति या महिला के ब्रेन-डेड को लेकर अंतिम निर्णय लेती है. एक बार जब मरीज को ब्रेन डेड घोषित कर दिया जाता है, तो उसके कई अंग और टीशूज निकाले जा सकते हैं. इसमें हृदय, किडनी, लीवर और अग्न्याशय आदि शामिल हैं. हालांकि, दिल को केवल 55-60 वर्ष की आयु तक ही दान किया जा सकता है.
February 17, 2025, 09:51 IST

