पीले पेट वाले स्लाइडर कछुआ ने पाइप को बनाया गलियारा
अध्ययन में यह भी दर्शाया गया कि कई सरीसृप, जैसे पीले पेट वाले स्लाइडर कछुआ पाइपों का इस्तेमाल तालाबों के बीच के गलियारे के रूप में कर रहे थे। शोधकर्ताओं ने यह सुझाव दिया कि यह सिस्टम जानवरों को व्यस्त सड़कों को पार करने और उनसे होने वाले खतरों से बचने की अनुमति देता है।
शोध में पाया गया कि एलिगेटर उन पांच स्थलों में से चार में देखे गए, जहां वे एक तालाब से दूसरे तालाब की ओर तैरते हुए पाए गए। सीवेज सिस्टम में अन्य जानवरों में ओपॉसम, आर्मडिलो, बिल्लियां, गिलहरी, काले चूहें, एग्रेट्स और मेंढक शामिल थे।
‘शहरी योजनाकारों के काम आएंगे ये निष्कर्ष’
वैज्ञानिकों का मानना है कि उनके निष्कर्ष शहरी योजनाकारों को भविष्य के शहरों में ज्यादा पारिस्थितिकी-सचेत डिजाइन पर विचार करने के लिए प्रेरित करेंगे। हालांकि, अध्ययन के लेखकों ने यह भी स्वीकार किया कि उभयचरों और सरीसृपों की संख्या कम हो सकती है, इसलिए भविष्य में और ज्यादा अध्ययन की आवश्यकता है। इस अध्ययन ने वन्यजीवों के अनुकूल शहरी बुनियादी ढांचे की बढ़ती आवश्यकता को उजागर किया है और शहरों में प्रजातियों की सुरक्षा के लिए ज्यादा अनुसंधान का आह्वान किया है।

