एएमयू अधिकारी के अनुसार, प्रोफेसर ने कई हफ्तों तक जवाब नहीं दिया, इसलिए अधिकारियों ने उन्हें ‘अनुशासनहीनता और झूठी शिकायतें दर्ज करने’ के लिए निलंबित करने का कदम उठाया। इस अवधि के दौरान उन्हें केवल निर्वाह भत्ता मिलेगा। अधिकारियों ने जांच पूरी होने तक उनके जिले छोड़ने पर भी रोक लगा दी है।
जांच में पता चला कि रियाजुद्दीन (50) ने कथित तौर पर पिछले साल महिला छात्रों के नाम का इस्तेमाल करते हुए विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को 20 से अधिक पत्र भेजे थे। इनमें उन्होंने 40 वर्षीय सहकर्मी प्रोफेसर इशात मोहम्मद खान पर छात्राओं को परेशान करने का आरोप लगाया था।
इसके बाद एएमयू प्रशासन ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने इन फर्जी चिट्ठियों का पता लगाने के लिए एक गुप्त अभियान शुरू किया। पुलिस ने विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों के सीसीटीवी की निगरानी शुरू की, लेकिन यह देखकर सभी हैरान रह गए जब पाया कि रियाजुद्दीन नियमित रूप से स्थानीय डाकघर जाकर झूठे शिकायत पत्र भेज रहे थे।
इन दोनों प्रोफेसरों के परिचित एक सहयोगी ने कहा, ‘वे कभी एक-दूसरे को पसंद नहीं करते थे, लेकिन महिला छात्रों के नाम का इस्तेमाल करके अपने हिसाब बराबर करने की यह घटना एक गंभीर सीमा को पार कर जाती है।

