38 दिन का था टूर प्लान
चौखंभा तीन पर्वत को दो पर्वतारोही 11 सितंबर से 18 अक्टूबर तक फतह करने वाले थे। बीच में कुछ कमियों की वजह से वे रास्ते में फंस गए। चौखंभा पीक पर फंसे विदेशी पर्वतारोहियों की खोज के लिए सेना और एसडीआरएफ टीम ने कमान संभाली। टीम उन्हें रेस्क्यू करने पैदल ही निकल पड़ी। शनिवार को एसडीआरएफ के चार जवानों की टीम को एडवांस बेस कैंप पर उतारा गया। शनिवार रात में रणनीति बनाई गई। रविवार सुबह ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और दुर्गम रास्तों की चुनौतियों के बावजूद एसडीआरएफ टीम ने तत्परता के साथ ट्रैक के जोखिम भरे हिस्सों में पैदल सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
जोशीमठ पहुंचाए गए ट्रैकर
एसडीआरएफ डीआईजी रिधिम अग्रवाल ने कहा कि एसडीआरएफ रेस्क्यू टीम के पैरेलल सर्च ऑपरेशन में जुटी भारतीय सेना की रेस्क्यू टीम ने हेलीकॉप्टर से ट्रैक पर रेकी की। इससे दोनों ट्रैकर्स को ढूंढ़ कर एयरलिफ्ट किया गया। उन्हें जोशीमठ हेलीपैड तक पहुंचाया गया। दोनों विदेशी ट्रैकर्स पूरी तरह से सुरक्षित हैं। सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने कहा कि एसडीआरएफ टीम जो एडवांस बेस कैंप से आगे सर्चिंग कर रही थी, उसे भी सेना की हेलीकॉप्टर से जोशीमठ लाया जा रहा है।
पांच लोगों की थी टीम
चमोली के चौखंभा तीन पर्वत की 7974 मीटर ऊंचाई पर पर्वतारोहण के लिए विदेशी महिला पर्वतारोही अमेरिका निवासी मिशेल थैरेसा और ब्रिटेन निवासी थैजेन मेनर्स आई थीं। उनके साथ इंडियन माउंटनेयरिंग फाउंडेशन के रंजन शर्मा के नेतृत्व में एक कुक और एक पोर्टर समेत 5 लोग आए थे। इस ट्रैकिंग अभियान को 11 सितंबर से 18 अक्टूबर तक पूरा होना था।
18 सितंबर को पांच सदस्यीय दल बद्रीनाथ के माणा से रवाना हुआ। ट्रैकिंग ग्रुप में शामिल महिला पर्वतारोही बर्फ से ढंकी चौखंभा तीन पर्वत पर एलपाइन स्टाइल क्लाइमिंग अभियान पर थी। इस दौरान उनका बैग खाई में गिर गया। इसके बाद से ही दोनों ट्रैक्टर ग्रुप से बिछड़ गई थीं।

