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7th Pay Commission : पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वेतन और भत्ते दिलाने के लिए 7वें वेतन आयोग का गठन किया है. राज्य सरकार ने 1 जनवरी, 2026 से राज्य के कर्मचारियों को इसका लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि जल्द ही राज्य के कर्मचारियों ने केंद्र के बराबर ही वेतन और भत्ते मिलने शुरू हो जाएंगे.
पश्चिम बंगाल में 7वां वेतन आयोग अब लागू होने वाला है.
नई दिल्ली. देश में एक तरफ तो 8वें वेतन आयोग पर चर्चा हो रही है और लाखों कर्मचारियों को अपने वेतन-भत्ते बढ़ने का इंतजार है. इस बीच, पश्चिम बंगाल में 7वें वेतन आयोग पर काम शुरू हो गया है. आपको अगर कोई कंफ्यूजन है तो बता दें कि पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है, जहां के तमाम कर्मचारियों को अभी तक 7वें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिला है. सरकार बदलने के बाद अब राज्य के कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों के समान वेतन दिलाने के लिए 7वें वेतन आयोग का गठन किया गया है.
पश्चिम बंगाल सरकार ने पिछले दिनों 7वें वेतन आयोग का गठन किया है. इस आयोग का मकसद राज्य के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के समान वेतन, 11 साल बाद रूपांतरित पेंशन की बहाली और सालाना वेतन वृद्धि को तीन से बढ़ाकर कम से कम 5 फीसदी करना शामिल है. इस नियम और शर्तों को पश्चिम बंगाल के सातवें वेतन आयोग में भी शामिल किया गया है. हाल में गठित यह आयोग राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में व्यापक संशोधन, करियर प्रगति, सेवानिवृत्ति और स्वास्थ्य देखभाल लाभ में बदलाव का प्रस्ताव करने पर विचार कर रहा है.
किस तरह के लाभ में होगा बदलाव
आयोग को मौजूदा वेतन ढांचे, भत्तों, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की समीक्षा कर उन्हें मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों तथा महंगाई के अनुरूप तर्कसंगत बनाने का दायित्व दिया गया है. सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावों का मकसद सेवा शर्तों के सभी प्रमुख पहलुओं को इसमें शामिल करते हुए मौजूदा व्यवस्था की विसंगतियों को दूर करना है. सातवें वेतन आयोग के कार्य-दायरे में राज्य सरकार के कर्मचारियों और केंद्रीय वेतन आयोग के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के वेतन स्तर में समानता लाना, पूरे देश में एक जैसा स्तर हासिल करना और वेतन ढांचे में अंतर के कारण होने वाले कानूनी विवादों को कम करना शामिल है.
कब से लागू होगा नया बदलाव
आयोग के प्रस्तावित शर्तों में औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर महंगाई भत्ता तय करने की व्यवस्था शुरू करने और इसके भुगतान के लिए एक स्थायी आदेश की सिफारिश करने की भी बात कही गई है. आयोग से कहा गया है कि वह एक जनवरी, 2026 से संशोधित वेतन ढांचे को केवल कागजी तौर पर नहीं, बल्कि असल में लागू करने पर विचार करे. इसका मकसद राज्य के कर्मचारियों को वेतन-भत्ते केंद्र के समान दिलाने के साथ-साथ पेंशन को लेकर भी समानता लाना है.
अन्य राज्यों में क्या है ढांचा
देश के अन्य राज्यों में 7वां वेतन आयोग पहले से ही लागू है. लेकिन, पूर्व की राज्य सरकार (बनर्जी बनर्जी की सरकार) ने केंद्र की नीतियों का विरोध करते हुए अपने कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया था. अब सत्ता बदलने के साथ ही कर्मचारियों के लिए नए आयोग के तहत भत्ते और पेंशन को बेहतर बनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. देश के अन्य राज्यों में पहले से ही 7वां वेतन आयोग लागू है और वहां के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के समान भत्ते व अन्य सुविधाएं मिल रही हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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