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History of 24 January: 26 जनवरी के दिन पूरा देश शान से गणतंत्र दिवस मनाता है. मगर, क्या आपको पता है कि इससे दो दिन पहले यानी कि आज ही के दिन देश को दो अनमोल तोहफे मिले थे. 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने जन गण मन को राष्ट्रगान चुना और डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने थे.
भारतीय इतिहास में 24 जनवरी का महत्व जानते हैं. (एआई फोटो)Indian History on 24th January: भारतीय इतिहास में 26 जनवरी का अलग महत्व है. आज ही के दिन हमारे देश में संविधान लागू हुआ था. जो किसी संप्रभू देश को चलाने में काफी अहम भूमिका अदा करता है. संविधान ही देश के प्रत्येक नागरिकों वह अधिकार देता है, जिसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता है. मगर, क्या आपको पता है कि भारत के गणतंत्र दिवस से दो दिन पहले देश को दो अमूल्य चीजें मिली थीं. दरअसल, 24 जनवरी 1950 की तारीख ने भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी थी? यह वह दिन था जब आजाद भारत को उसकी ‘आवाज’ और उसका ‘मुखिया’ दोनों मिले.
‘जन गण मन’ बना देश की धड़कन: आजादी की लड़ाई में जिस गीत ने क्रांतिकारियों और आम जनता के दिलों में देशभक्ति की लौ जलाई थी, उसे इसी दिन आधिकारिक पहचान मिली. 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित ‘जन गण मन’ को भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया.
राष्ट्रगान को अपनाया गया था
मूल रूप से बांग्ला में लिखे गए और 1911 में पहली बार कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाए गए इस गीत ने भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरो दिया. राष्ट्रगान की पंक्तियों में पंजाब, सिंध (जो अब पाकिस्तान में है), गुजरात, मराठा, द्राविड़ (दक्षिण भारत), उत्कल (ओडिशा) और बंग (बंगाल) का जिक्र सिर्फ भूगोल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का वर्णन है. आज जब 52 सेकंड का यह गान गूंजता है, तो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है.
‘जन गण मन’ को भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया था और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्वतंत्र भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया. (एआई इमेज)
देश को मिला पहला ‘महामहिम’
इसी ऐतिहासिक दिन भारत को उसका पहला संवैधानिक संरक्षक भी मिला. डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्वतंत्र भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया. यह केवल एक पद की बहाली नहीं थी, बल्कि नवगठित गणराज्य को स्थिरता और गरिमा देने वाला एक बड़ा कदम था. डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कद इतना विराट था कि वे भारतीय इतिहास के इकलौते ऐसे नेता बने, जिन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली.
लोकतंत्र की नींव का दिन
24 जनवरी 1950 का दिन इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भारत ने खुद को पहचाना और स्वीकार किया. एक तरफ राष्ट्रगान के रूप में देश की आत्मा को स्वर मिला, तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति के रूप में संविधान के रक्षक का चयन हुआ. आज जब हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं, तो उसकी सफलता के पीछे 24 जनवरी के उस फैसले की गूंज जरूर सुनाई देती है, जिसने भारत को विश्व पटल पर एक सशक्त गणराज्य के रूप में स्थापित किया.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

