इसके साथ ही न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ए जी मसीह की पीठ ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के कचरे के निपटान के आज होने वाले परीक्षण पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कचरा निपटान का विरोध करने वाले नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों सहित पीड़ित पक्षों से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा है, जो मामले की सुनवाई कर रहा है।
मौके पर वरिष्ठ अधिकारी तैनात
एक अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, प्रशासन ने औद्योगिक शहर पीथमपुर में सुरक्षा बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि इलाके में 24 थानों के करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं। कचरे के निपटान का विरोध करने वालों ने कहा कि वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बात सुनी और उन्हें हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने को कहा।
पहले चरण में जलेगा 10 टन कचरा
प्रदर्शनकारियों में से एक संदीप रघुवंशी ने कहा, “हमारे वकीलों ने कहा है कि वे हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। आंदोलन जारी रहेगा। हम अपने वकीलों के जरिए पीथमपुर के लोगों से बात करेंगे और उनके बताए तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।” इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के बाद इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने कहा, “पीथमपुर की कचरा निपटान इकाई में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के कचरे को जलाने के पहले परीक्षण की तैयारी शुरू हो गई है।” उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, इस परीक्षण के पहले चरण में 10 टन कचरा जलाया जाएगा।
कैसे हुई त्रासदी
बता दें कि दो और तीन दिसंबर, 1984 की दरम्यानी रात को भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इस गैस के दुष्प्रभाव से करीब 5,479 लोग मारे गए थे और हज़ारों लोग अपंग हो गए थे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है।

