श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को जम्मू डिवीजन के 41 आतंक पीड़ित परिवारों के ‘नेक्स्ट ऑफ किन्न’ (NOKs) को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे. इसके अलावा 22 आयु-शिथिलीकरण मामलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के 19 शहीद कर्मियों के परिजनों को भी SRO-43 और रिहैबिलिटेशन असिस्टेंस स्कीम के तहत नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए.
उपराज्यपाल ने कहा कि “आतंक के शिकार परिवारों को दशकों तक नजरअंदाज किया गया, उन्हें चुपचाप दर्द झेलने के लिए छोड़ दिया गया. आज सरकार ऐसे परिवारों को पहचान, सम्मान और पुनर्वास दे रही है.” उन्होंने दोहराया कि यह प्रशासन की प्रतिबद्धता है कि जिन परिवारों ने सबसे बड़ी कीमत चुकाई, उनकी गरिमा और आर्थिक सुरक्षा बहाल की जाए. उपराज्यपाल ने बताया कि जुलाई 2025 में भी 94 आतंक पीड़ित परिवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे. कुल मिलाकर जम्मू डिवीजन के 135 परिवारों को लंबी प्रतीक्षा के बाद आखिरकार न्याय मिला है.
20 साल पुराने जख्मों को मिला मरहम
सभा के दौरान LG सिन्हा ने कई दर्दनाक घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि
राजौरी के नसीब सिंह जिनके पिता धर्म सिंह और चार अन्य की 2005 में हत्या कर दी गई थी 20 वर्षों तक डर और असुरक्षा में जीते रहे. अब उनके परिवार को नई उम्मीद मिली है.
रियासी के अख्तर हुसैन, जिन्हें 2005 में आतंकियों ने गोलियों से भून दिया था उनके परिवार ने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया.
किश्तवाड़ के SPO संजीत कुमार,जो 2004 में अपनी शादी की तैयारियों के बीच अपने दोस्त के साथ मारे गए. उनके परिवार को भी आखिरकार राहत मिली है.
उपराज्यपाल ने कहा, “इन परिवारों ने अकल्पनीय दर्द झेला है. आज जो नई शुरुआत हुई है, वह उन्हें सम्मान के साथ दोबारा जीवन बनाने की ताकत देगी.
आतंक तंत्र के खिलाफ सख्त संदेश
उपराज्यपाल सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में पूरे आतंक तंत्र को जड़ से खत्म किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “हमने शांति खरीदी नहीं – शांति स्थापित की है. अब आतंकियों, अलगाववादियों या उनके समर्थकों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. उन्हें पहचानकर कड़ी से कड़ी सजा दी जा रही है.”
उन्होंने उन तत्वों को भी चेतावनी दी जो देश के खिलाफ गलत सूचनाएं या नकारात्मक नैरेटिव फैला रहे हैं. उपराज्यपाल ने कहा, “ऐसे लोगों पर कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी.” उपराज्यपाल ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे जम्मू-कश्मीर के विकास के ‘महायज्ञ’ में बिना किसी स्वार्थ के योगदान दें.
कार्यक्रम में DGP नलिन प्रभात, गृह विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी चंद्राकर भारती, GAD कमिश्नर सेक्रेटरी एम. राजू, डिविजनल कमिश्नर जम्मू रमेश कुमार, IGP जम्मू भीम सेन टुटी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और पीड़ित परिवार मौजूद रहे. विधायक और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए.

