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Palamu Bhaskar Dubey Success Story: पलामू के चन्या निवासी भास्कर दुबे, जो भारतीय सेना में टैंक गनर थे, अब रिटायरमेंट के बाद युवाओं को फिट बनाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने 2020 में ‘बीडी फिटनेस’ की शुरुआत की, जिससे उन्हें सरकारी नौकरी से भी अधिक आय हो रही है और कई लोगों को रोजगार भी मिला है.
पलामू: पलामू के चन्या निवासी भास्कर दुबे की कहानी संघर्ष, समर्पण और अनुशासन की एक ऐसी मिसाल है. जो हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है. 17 साल की उम्र में भारतीय सेना में शामिल होकर सरहद पर टैंक के साथ देश की रक्षा करने वाले भास्कर दुबे, अब अपनी नई पारी में पलामू के युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बना रहे हैं.
17 साल की उम्र में सेना में चयन और 21 वर्षों का सफर
स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण दुबे के पुत्र भास्कर दुबे को बचपन से ही सेना और टैंक चलाने का जुनून था. वर्ष 1998 में जब वे इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे थे. तब उनका चयन भारतीय सेना में ‘टैंक गनर’ के रूप में हुआ. सेना में अपने 21 वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने टैंक संचालन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सैन्य जिम्मेदारियां निभाईं और युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों का भी सामना किया. वर्ष 2019 में चोट (इंजरी) और फिटनेस के अपने पैशन को नई दिशा देने की चाहत के कारण उन्होंने सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली.
रिटायरमेंट के बाद नई राह और कोरोना की चुनौती
सेना छोड़ने के बाद जीवन की नई दिशा चुनना आसान नहीं था. कुछ समय तक असमंजस की स्थिति रही, लेकिन फिटनेस के प्रति उनके पुराने लगाव ने उन्हें आगे का रास्ता दिखाया. वर्ष 2020 में उन्होंने पांकी रोड स्थित शिव मंदिर के पास ‘बीडी फिटनेस’ नाम से एक आधुनिक फिटनेस सेंटर की शुरुआत की. शुरुआत में चुनौतियां बहुत थीं. जिम शुरू होते ही कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण कारोबार प्रभावित हुआ. इसके अलावा शहर में 15 से 16 अन्य जिम खुलने से प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई. शुरुआती दौर में 100 लोगों को भी जोड़ना मुश्किल था. लेकिन सेना से मिले अनुशासन, धैर्य और मेहनत के दम पर वे लगातार डटे रहे और पीछे मुड़कर नहीं देखा.
महिलाओं के लिए विशेष समय और आधुनिक सुविधाएं
भास्कर दुबे ने खुद भी फिटनेस और ट्रेनिंग से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की. उनके जिम में कार्डियो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और आधुनिक मशीनों की सुविधा उपलब्ध है. वर्तमान में उनके सेंटर से लगभग 250 लोग जुड़े हुए हैं. जिम की समय सारणी भी बेहद अनुशासित है. सुबह: 05:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक (सामान्य ट्रेनिंग), शाम: 04:00 बजे से 06:00 बजे तक (केवल महिलाओं और लड़कियों के लिए विशेष समय), रात: 06:00 बजे से रात 10:00 बजे तक (अन्य लोगों के लिए सत्र).
कमाई 80 हजार प्रतिमाह और युवाओं को रोजगार
जिम की मासिक फीस 1,200 रुपये रखी गई है. भास्कर दुबे बताते हैं कि आज उन्हें इस फिटनेस सेंटर से प्रतिमाह लगभग 80 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. यह किसी सरकारी नौकरी से भी अधिक है. इसके अलावा उन्होंने अपने इस सेंटर के जरिए कई स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है. उनके जिम से प्रशिक्षित कई युवा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं. रिटायरमेंट के बाद आत्मनिर्भर बनने और दूसरों को दिशा दिखाने वाले भास्कर दुबे आज पलामू के युवाओं के लिए एक सच्चे रोल मॉडल बन चुके हैं.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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