Azaadi Se Pehle Ke Woh Das Din: भारत की आजादी की तारीख में बस अब पांच दिन बचे थे. दिल्ली सहित पूरे देश में अलग-अलग स्तर पर आजादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन इसी बीच एक ऐसा सवाल सामने आया, जो सिर्फ झंडे का सवाल नहीं था. सवाल था कि जिस ब्रिटिश हुकूमत से भारत आजाद होने जा रहा है, उसके झंडे यूनियन जैक को आजाद भारत की सरकारी इमारतों पर कब और किस तरह फहराया जाएगा? इस सवाल को लेकर जवाहरलाल नेहरू और लॉर्ड माउंटबेटन के बीच 5 अगस्त से पत्राचार शुरू हुआ. दोनों के बीच इस मसले पर 10 अगस्त तक पत्राचार चलता रहा.
नेहरू आर्काइव्स में मौजूद दस्तावेजों के अनुसार, 5 अगस्त को भेजे गए पत्र में माउंटबेटन ने कुछ तारीखों का जिक्र करते हुए कहा था कि वह चाहते हैं कि इन तारीखों में भारतीय राष्ट्रध्यव के साथ यूनियन जैक को भी फहराया जाए. इन तारीखों में पहली जनवरी (आर्मी डे), पहली अप्रैल (एयर फोर्स डे), 25 अप्रैल (एंजैक डे), 24 मई (कॉमनवेल्थ डे), 12 जून (किंग्स ऑफिशियल बर्थडे), 14 जून (यूनाइटेड नेशंस फ्लैग डे), 4 अगस्त (क्वीन का बर्थडे), 15 अगस्त ( भारतीय इंडिपेंडेंस डे), 7 नवंबर (नेवी डे) और 11 नवंबर (रिमेंबरेंस डे) शामिल थे. पंडित जवाहर लाल नेहरू ने माउंटबेटन के इस विषय पर अपना पहला जवाब 6 अगस्त को लिखा. अपने जवाब में 15 अगस्त को लेकर पंडित नेहरू ने अपना रुख साफ कर दिया.
6 अगस्त को नेहरू की तरह से माउंटबेटन को लिखा गया पत्र
नई दिल्ली
6 अगस्त 1947
प्रिय लॉर्ड माउंटबेटन,
5 अगस्त के आपके पत्र के लिए धन्यवाद, जिसमें आपने भारत में यूनियन जैक फहराने की तिथियों की सूची भेजी थी. मैं समझता हूं कि इसका मतलब यह है कि सार्वजनिक भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ यूनियन जैक भी फहराया जाएगा.
सूची में केवल एक तिथि ऐसी है जिसे मैं पूरी तरह उपयुक्त नहीं मानता. वह है 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस. इस दिन राष्ट्रीय ध्वज का विशेष महत्व है और मेरा मानना है कि इसे अकेले ही फहराना चाहिए.
जहां तक अगले 15 अगस्त का सवाल है, मैं समझता हूँ कि इस पर सहमति हो चुकी थी. मेरा सुझाव है कि इस तिथि की सालगिरह पर भी यही नियम लागू किया जाए.
मैं आपको बताना चाहता हूं कि लंदन स्थित इंडिया हाउस पर अगले 15 अगस्त को क्या किया जाए, इस बारे में मुझसे पूछा गया था. सामान्यतः वहां केवल राष्ट्रीय ध्वज ही फहराया जाएगा. लेकिन मेरा विचार था कि लंदन में उस विशेष दिन इंडिया हाउस पर यूनियन जैक भी फहराना उचित और उचित होगा. इस आशय के निर्देश हमारे हाई कमिश्नर को भेज दिए गए हैं.
भवदीय
जवाहरलाल नेहरू
यूनियन जैक के लिए पूरी तरह से बंद नहीं किए गए दरवाजे
नेहरू ने भारतीय राष्ट्रध्वज के साथ यूनियन जैक फहराने वाली माउंटबेटन को पूरी तरह से खारिज नहीं किया था. अपने इस पत्र में नेहरू ने स्पष्ट तौर पर लिखा था कि उन्हें लंदन स्थित इंडिया हाउस में 15 अगस्त को भारतीय तिरंगे के साथ यूनियन जैक फहराने में कोई आपत्ति नहीं है. इस बाबत, उनकी तरह से लंदन स्थित भारतीय हाई कमिश्नर को निर्देश भी भेज दिए गए थे. नेहरू के पत्र के जवाब में माउंटबेन ने 9 अगस्त को एक और पत्र लिखा. इस पत्र में कुछ खास बदलाव किए गए थे. अबकी बार 15 अगस्त 1947 को यूनियन जैक फहराने की तारीख लिस्ट से हटा दी गई थी. लेकिन माउंटबेटन ने भविष्य के लिए एक नया सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि अगले साल इस सवाल को भारत और पाकिस्तान के हाई कमिश्नरों द्वारा एक साथ उठाया जाए. यानी दोनों नए डोमिनियन मिलकर इस बात पर विचार करें कि भविष्य में 15 अगस्त के दिन यूनियन जैक फहराया जा सकता है या नहीं.
पाकिस्तान के साथ बातचीत पर नेहरू ने भरी हामी
10 अगस्त 1947 को नेहरू ने माउंटबेटन को एक छोटा लेकिन बेहद अहम जवाब भेजा. उन्होंने 9 अगस्त के पत्र के लिए धन्यवाद दिया. साथ ही लिखा कि 15 अगस्त को यूनियन जैक फहराने के सवाल पर वह अगले साल पाकिस्तान सरकार के साथ मिलकर विचार करने के लिए तैयार हैं. यानी नेहरू ने न तो इसे तुरंत स्वीकार किया और न ही भविष्य की संभावना को पूरी तरह खारिज किया. उन्होंने फैसला अगले साल भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच विचार-विमर्श पर छोड़ दिया.
10 अगस्त को नेहरू की तरह से माउंटबेटन को लिखा गया पत्र
नई दिल्ली
10 अगस्त 1947
प्रिय लॉर्ड माउंटबेटन,
9 अगस्त के आपके पत्र के लिए धन्यवाद, जिसमें यूनियन जैक फहराने की तिथियों के बारे में लिखा था. हम अगले वर्ष 15 अगस्त के प्रश्न पर पाकिस्तान सरकार के साथ मिलकर खुशी से विचार करेंगे, जैसा आपने सुझाया है.
भवदीय
जवाहरलाल नेहरू
पाकिस्तान में जोगेंद्रनाथ मंडल को मिली बड़ी भूमिका
10 अगस्त का दिन सिर्फ दिल्ली में नेहरू-माउंटबेटन पत्राचार के कारण खास नहीं था. इसी दौर में कराची में पाकिस्तान की नई संविधान सभा की शुरुआती कार्यवाही चल रही थी और जोगेंद्रनाथ मंडल को अस्थायी चेयरमैन की जिम्मेदारी मिली. मंडल बंगाल के प्रमुख दलित नेताओं में थे. वह मुस्लिम लीग के साथ नकेवल राजनीतिक रूप से जुड़े, बल्कि उनका मानना था कि दलितों के हितों की रक्षा के लिए मुस्लिम लीग के साथ सहयोग किया जा सकता है. 1946 के डायरेक्ट ऐक्शन डे के दौरान कलकत्ता में भयंकर हिंसा हुई थी. मंडल ने अनुसूचित जाति के लोगों से इस साम्प्रदायिक संघर्ष से दूर रहने की अपील की थी. बाद में यही राजनीतिक रिश्ता उन्हें जिन्ना के करीब ले गया.
10 अगस्त को पाकिस्तान की संविधान सभा की प्रक्रिया में मंडल की भूमिका सामने आई. अगले दिन, 11 अगस्त को उन्होंने अस्थायी चेयरमैन के रूप में मोहम्मद अली जिन्ना को संविधान सभा का अध्यक्ष घोषित किया. इसके बाद जिन्ना ने अपना भाषण दिया, जिसमें उन्होंने नए पाकिस्तान में नागरिकों की समानता की बात रखी. इस तरह 10 अगस्त 1947 को इतिहास के दो अलग-अलग पन्ने एक साथ खुल रहे थे. दिल्ली में नेहरू इस बात को लेकर बेहद सावधान थे कि आजाद भारत की सरकारी इमारतों पर कौन सा झंडा और किस दिन फहरेगा. वहीं कराची में जोगेंद्रनाथ मंडल जैसे हिंदू दलित नेता नए पाकिस्तान की संवैधानिक व्यवस्था की शुरुआती प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे थे.

