Agency:एजेंसियां
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भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को जरूरी बताया है. एनजीटी के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय समस्याएं किसी भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं हैं, इसलिए अलग-अलग देशों के विशेषज्ञों को साथ आकर अपने अनुभव और बेहतर तौर-तरीके साझा करने चाहिए. CJI ने संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(g) का हवाला देते हुए पर्यावरण संरक्षण में सरकार और नागरिकों की जिम्मेदारी बताई.
सीजेआई सूर्यकांत ने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर संवाद और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मुद्दे किसी भौगोलिक सीमा में बंधे नहीं हैं, इसलिए अलग-अलग देशों और न्यायक्षेत्रों के विशेषज्ञों को साथ आकर अनुभव और बेहतर तौर-तरीके साझा करने चाहिए.
नई दिल्ली में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ से इतर समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में सीजेआई सूर्यकांत ने इस पहल का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन में न्यायपालिका, वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों को एक साझा मंच मिलता है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े सवाल पूरी दुनिया को प्रभावित करते हैं. ऐसे में अलग-अलग देशों में अपनाए जा रहे तरीकों, नीतियों और न्यायिक दृष्टिकोण पर चर्चा जरूरी है. उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विशेषज्ञ अपने विचार और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ साझा कर सकते हैं और यह समझने में मदद मिलती है कि अलग-अलग न्यायक्षेत्र पर्यावरणीय चुनौतियों से किस तरह निपट रहे हैं.
CJI ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारत की सभ्यतागत परंपरा का हिस्सा रहा है और संविधान में भी इसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(g) का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ नागरिकों की भी है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्षों के दौरान पर्यावरण से जुड़े कानून और न्यायशास्त्र को विकसित करते हुए स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को विकास के रास्ते में बाधा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. जरूरत ऐसी विकास प्रक्रिया की है जो सतत विकास के सिद्धांत पर आधारित हो और जिसमें विकास परियोजनाओं के लिए लोगों और पर्यावरण के प्रति जवाबदेही बनी रहे.
उन्होंने पर्यावरण से जुड़े मामलों में न्यायपालिका द्वारा विकसित कई महत्वपूर्ण सिद्धांतों का भी जिक्र किया. इनमें Precautionary Principle, Polluter Pays Principle, Absolute Liability और Public Trust Doctrine शामिल हैं.
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पर्यावरण संबंधी न्यायशास्त्र अब केवल नुकसान को रोकने तक सीमित नहीं रहा है. इसमें विशेषज्ञों की निगरानी, पर्यावरण की बहाली, मुआवजा और जवाबदेही जैसे पहलू भी शामिल हो गए हैं.
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साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.
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