Last Updated:
भारत में ब्रिटिश हुकूमत का राज लगभग 250 वर्षों तक रहा है. ब्रिटिश हुकूमत को भारत से भगाने में कई क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है. उन्हीं में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से भी कुछ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. भगत सिंह के साथी और लाहौर बमकेस के अभियुक्त गया प्रसाद जिनको टीबी की बीमारी के चलते अमहट जेल भेज दिया गया था. उस समय सुल्तानपुर में कई अलग-अलग भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की आदेशों का पालन अक्षरशः सुल्तानपुर के कांग्रेस जन किया करते थे और उसका स्थानीय स्तर पर काफी परिणाम भी देखने को मिलता था.
सुल्तानपुरः भारत में ब्रिटिश हुकूमत का राज लगभग 250 वर्षों तक रहा है. ब्रिटिश हुकूमत को भारत से भगाने में कई क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है. उन्हीं में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से भी कुछ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. भगत सिंह के साथी और लाहौर बमकेस के अभियुक्त गया प्रसाद जिनको टीबी की बीमारी के चलते अमहट जेल भेज दिया गया था. उस समय सुल्तानपुर में कई अलग-अलग भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की आदेशों का पालन अक्षरशः सुल्तानपुर के कांग्रेस जन किया करते थे और उसका स्थानीय स्तर पर काफी परिणाम भी देखने को मिलता था. ऐसे में आज हम जानेंगे कौन थे भगत सिंह के साथी और लाहौर बमकेस से उनका किस तरह से संबंध था.
कौन थे भाई परमानंद
वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं गया प्रसाद मूल रूप से कानपुर के रहने वाले थे क्रांतिकारी गतिविधियों में उनको काला पानी तक की सजा भी हुई थी. षड्यंत्र केस के तहत मुकदमा चलाया गया और 7 अक्टूबर 1930 को आजीवन कारावास (काले पानी की सजा) सुनाई गई. अपने क्रांतिकारी जीवन में गया प्रसाद सुल्तानपुर जिले के अमहट जेल में भी कुछ दिनों तक रहे.
सुल्तानपुर से यह है संबंध
सुल्तानपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जब रामजस यादव बने तो उसी समय प्रसिद्ध क्रान्तिकारी गया प्रसाद सुलतानपुर आए. ज्ञातव्य रहे कि इसके पूर्व अमर शहीद भगतसिंह के साथी, लाहौर बम केस के अभियुक्त क्रान्तिकारी गयाप्रसाद टी.बी. की दवा के सिलसिले में अहमद जेल भेज दिए गये थे. उनसे भी किसी न किसी बहाने रामजस यादव आदि मिला करते थे और क्रान्तिकारी गतिविधियों की जानकारी रखते थे. इस तथ्य को पूर्व कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और भगतसिंह के साथी स्व. अजय घोष ने अपनी पुस्तक में भी लिखा है.
सुल्तानपुर में तेज हुआ आंदोलन
गया प्रसाद जब सुल्तानपुर की अमहट जेल में थे तो उसके बाद सुल्तानपुर में मुक्ति आंदोलन की गतिविधियां तेज हो गई एजिसमें 20 दिसम्बर सन् 1940 ई. को सुभाषचन्द्र बोस सुलतानपुर आये. उनको सुनने के लिए विशाल जन समूह उमड़ पड़ा था. इसी समय श्री प्रकाश जी ने सुल्तानपुर के कादीपुर में कांग्रेस जनों का दो दिवसीय शिविर चलाया जिसमें किसानों को आजादी के संघर्ष को दृढ़तापूर्वक चलाने के लिए प्रशिक्षित किया. इस शिविर में रफी अहमद किदवई ने भी भाग लिया था.
सन् 1940-41 ई. तक जिले में कांग्रेस को व्यापक जन समर्थन मिल चुका था। सुभाषचन्द्र बोस के व्याख्यान ने तो कांग्रेस जनों पर जादू सा प्रभाव डाला, जिससे आन्दोलन तीव्रतर होता गया. भाई परमानंद के द्वारा जिला कांग्रेस कमेटी के क्रांतिकारियों को कई प्रकार की आंदोलनकारी प्रेरणाएं भी दी जाती थी.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

