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सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को है. इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और शिव-लक्ष्मी की आराधना से पुण्य मिलता है. सुबह स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करें. इसके बाद एक अनार लेकर उसके 111 दाने निकालें. किसी शिव मंदिर में जाकर ‘ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ’ मंत्र का जाप करते हुए एक-एक अनार का दाना शिवलिंग पर अर्पित करें. इस दौरान भगवान शिव से अपनी मनोकामना और आर्थिक परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें.धार्मिक मान्यता है कि इससे सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति के मार्ग खुल सकते हैं
अयोध्या: हिंदू धर्म में श्रावण पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. सावन मास में पड़ने के कारण इस पूर्णिमा को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार सावन की पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त को है इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और भगवान शिव की आराधना करने से पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है.
ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार सावन पूर्णिमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और सृष्टि के संचालन का भार भगवान शिव संभालते हैं. ऐसे में इस दिन भगवान शिव की आराधना के साथ माता लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं.
ये तीन उपाय आजमाएं
सुबह स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करें. इसके बाद एक अनार लेकर उसके 111 दाने निकालें. किसी शिव मंदिर में जाकर ‘ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ’ मंत्र का जाप करते हुए एक-एक अनार का दाना शिवलिंग पर अर्पित करें. इस दौरान भगवान शिव से अपनी मनोकामना और आर्थिक परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें.धार्मिक मान्यता है कि इससे सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति के मार्ग खुल सकते हैं.
पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद तांबे के लोटे में 11 साबुत चावल के दाने रखें. ध्यान रहे कि चावल टूटे हुए न हों। सफेद वस्त्र धारण कर भगवान शिव के मंदिर जाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल अर्पित करें.मान्यता है कि यह उपाय आर्थिक संकट दूर करने और मनोकामना पूर्ति में सहायक हो सकता है.
घर में भगवान शिव के चित्र के सामने दीपक जलाकर ‘ॐ जूं सः ॐ जूं सः’ मंत्र का जाप करें.पंडित कल्कि राम के अनुसार, इस मंत्र का नियमित जाप आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए किया जाता है.हालांकि मंत्र-जप की संख्या और विधि के संबंध में किसी योग्य आचार्य से मार्गदर्शन लेना उचित रहेगा.
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