नई दिल्ली. वनतारा ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें कोर्ट ने उसके वन्यजीवों के बचाव, उनके पुनर्वास और संरक्षण से जुड़े काम को पूरी तरह सही, नैतिक और कानूनी माना है. सुप्रीम कोर्ट ने इस काम को लेकर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है.
क्या फैसला हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की जिस पीठ ने यह फैसला दिया है उसमें जस्टिस प्राशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी.अंजारिया शामिल थे. 27 मई को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उन आरोपों की दोबारा से जांच करने से इनकार कर दिया है जिसमें यह कहा गया था कि जानवरों को एक देश से दूसरे देश ले जाने में गड़बड़ी हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो आरोप लगाए गए थे उनकी जांच पहले ही सर्वोच्च कोर्ट द्वारा बनाई गई विशेष जांच टीम (एसआईटी) कर चुकी थी. एसआईटी की रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने माना कि वनतारा ने यूएई, वेनेजुएला, ब्राजील, चेक गणराज्य और साउथ अफ्रीका से जो भी जानवर लाए गए या भेजे वह पूरी तरह से कानूनी थे. कोर्ट ने साफ कहा कि यह किसी भी तरह के व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं थे और केवल चिड़िया घर से चिड़िया घर ही भेजे गए थे. यानि जानवरों को एक चिड़ियाघर से दूसरे चिड़ियाघर के बीच सुरक्षा और संरक्षण के उद्देश्य से भेजे गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि ये सारे ट्रांसफर अंतरराष्ट्रीय समझौते CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) के नियमों के मुताबिक किए गए.
जामनगर के काम पर कोर्ट क्या बोला?
वनतारा ने अपने बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना है कि जामनगर में जो संरक्षण का काम हो रहा है वह ‘वैश्विक महत्व’ रखता है यानी दुनिया भर के लिए महत्वपूर्ण है. इसमें ब्राजील के साथ मिलकर लुप्त होते मकाऊ को उनके प्राकृतिक जंगलों में वापस बसाने की कोशिश हो या एक ऐसा संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम चलाना जो दुनियाभर में अलग–अलग प्रजातियों के पुनरुद्धार में मदद करता हो.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें (Photo:AI)
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन जानवरों को कानून के तहत सही तरीके से बचाकर लाया गया है और जिन्हें अब सुरक्षित, साफ–सुथरे और देखभाल भरे माहौल में रखा गया है. उनकी वर्तमान स्थिर जिंदगी को बेवजह हिलाना–डुलाना या बाधित करना खुद में क्रूरता जैसा हो सकता है.
वनतारा के सीईओ ने क्या कहा?
वनतारा के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर विवान करणी ने कहा कि यह फैसला उस सच्चाई की दोबारा पुष्टि करता है, जो हमारे अभियान में हमारा मार्गदर्शन करता है कि हमारे संरक्षण में आने वाले हर जानवर को पूरी तरह कानूनी तरीके से अपनाया गया है, नैतिक तरीके से जानवरों को संभाला गया है और उसे जीवनभर सुरक्षा दी गई है. देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर न सिर्फ हमारे काम की निष्पक्षता को मान्यता दी है, बल्कि हमारे काम के पीछे की भावना को भी स्वीकार किया है.
वनतारा में जानवरों के संरक्षण का कोई सिर्फ दावा नहीं है. यह रोज–रोज की करुणा के साथ किया जाने वाला काम है. हर शक करने वाले (संशयवादी) के लिए हमारा जवाब वही है, जो हर उस प्राणी से हमारा वादा है, जिसे हमने कभी ठीक किया है. सुप्रीम कोर्ट से हमारे कार्य को न्यायिक रूप से समर्थन मिला है और हम उन जानवरों के लिए पहले से भी ज्यादा प्रतिबद्ध हैं, जो हम पर भरोसा करते हैं और हमारी देखभाल पर निर्भर है.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर और क्या-क्या कहा? (Photo:AI)
मामला क्या था?
9 मार्च को को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विदेशों से जानवरों को लाए जानें में अनियमितताएं हुई हैं. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसले में कहा था कि इन आरोपों की कोई ठोस बुनियाद नहीं है. एसआईटी ने जो जांच की और जिसमें वनतारा को ‘क्लीन चिट’ दी वह सही है .
वनतारा की मूल सोच यह है कि हर जीवन मायने रखता है. सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार भी साफ कर दिया है कि एसआईटी की रिपोर्ट बिल्कुल ठीक है और सर्वोच्च अदालत का पहला फैसला भी ठीक था, इसलिए यह फैसला अब अंतिम माना जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें
- – पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया.
- – जानवरों को दूसरे देशों से लाने के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और प्राधिकरणों से पहले ही अनुमति ली गई है. इसलिए अदालत ने बाद में उठाई गई आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया.
- – जो नई याचिका अभी दाखिल की गई थी, जिसमें 9 मार्च के आदेश को वापस लेने और सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों से नई जांच कराए जाने की मांग की गई थी उसे भी कोर्ट ने खारिज कर दिया.
वनतारा की फोटो
सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
- कोर्ट ने अपने आदेश में विस्तार से कहा कि सितंबर 2025 तक के सभी ट्रांसफर की जांच एसआईटी ने की थी
- एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ निष्कर्ष दिए और इसके बाद 09 मार्च 2026 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने वहां दिए गए कारणों के आधार पर इस मामले को दोबारा खोलने से इनकार कर दिया और 15 सितंबर 2025 के आदेश की पुष्टि कर दी.
- कोर्ट ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट खुद द्वारा बनाई गई एसआईटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर चुका हो और बाद के आदेश में इस रिपोर्ट पर दोबारा विचार करने से साफ इनकार कर चुका हो तो ऐसे आदेश को एक अंतिम रूप मिल जाता है, जिसे यूं ही बार–बार चुनौती नहीं दी जा सकती.
- कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी संवैधानिक अधिकारिता का उद्देश्य यह नहीं है कि जिन मामलों की जांच उच्च स्तर की एसआईटी कर चुकी हो और जिन पर पहले से ही न्यायिक आदेश आ चुके हों उन्हें बार–बार खोलते रहा जाए.
- कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दिखाए गए कथित ‘नए साक्ष्य’ ज्यादातर अखबारों की खबरों और ऑनलाइन लेखों पर आधारित हैं. कोर्ट ने कहा कि केवल अनुमान और शक पर आधारित आरोपों को कानूनी रूप से मान्य आरोप नहीं माना जा सकता.

