सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल से खुदरा महंगाई 14 महीने के उच्च स्तर 6.21 पर पहुंच गई लेकिन आने वाले दिनों में यह RBI के लक्ष्य के करीब आ सकती है। इसकी वजह एजेंसी ने फसलों की अधिक बुवाई और पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न के बफर स्टॉक को बताया है।
राहत की उम्मीद कम
मूडीज ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मौसमी घटनाओं के चलते महंगाई के लिए जोखिम खत्म नहीं हुए हैं, लिहाजा RBI अपनी नीतियों को लेकर सतर्क रहेगा और कम उम्मीद है कि ब्याज दरों में राहत मिले। केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर में रेपो दर को 6.5% पर स्थिर रखा था। मूडीज के अनुसार, यह स्थिति अगले साल भी रह सकती है।
अगले महीने होगी बैठक
RBI की ब्याज दर निर्धारण करने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक अगले महीने होने वाली है और महंगाई के उच्च स्तर पर होने के कारण यह संभावना नहीं है कि RBI बेंचमार्क ब्याज दरों में कटौती करेगा। अपने ग्लोबल मैक्रो आउटलुक 2025-26 में US बेस्ट इस रेटिंग एजेंसी ने कहा कि आने वाले दिनों में घरेलू खपत बढ़ने की संभावना है, क्योंकि त्योहारी सीजन के दौरान खर्च में बढ़ोतरी हुई है और ग्रामीण मांग में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही निजी निवेश बढ़ने की संभावना है।
2025-26 के लिए क्या कहा?
2024 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में साल-दर-साल 6.7% की बढ़ोतरी हुई, जो घरेलू खपत में सुधार, मजबूत निवेश और मजबूत मैनुफैक्चरिंग एक्टिविटी के चलते हुई। जुलाई-सितंबर तिमाही में भी आर्थिक गति मजबूत बनी रही।
मूडीज ने कहा, …व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से भारतीय अर्थव्यवस्था ठोस विकास और नरम महंगाई के साथ एक अच्छी स्थिति में है। हम कैलेंडर वर्ष 2024 के लिए 7.2% की बढ़ोतरी का अनुमान लगाते हैं। 2025 में 6.6% और 2026 में 6.5% की बढ़ोतरी होगी।
इन्हें बताया अच्छा संकेत
मूडीज ने कहा कि मजबूत कॉर्पोरेट, बैंक बैलेंस शीट, मजबूत एक्सटर्नल पोजीशन और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार विकास के दृष्टिकोण के लिए अच्छे संकेत हैं। मूडीज रेटिंग्स की सीनियर वाइस प्रेजिडेंट माधवी बोकिल ने कहा, अधिकतर G-20 अर्थव्यवस्थाएं स्थिर बढ़ोतरी का अनुभव करेंगी। हालांकि, अमेरिकी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय नीतियों में चुनाव के बाद के बदलावों से इस स्थिरता पर असर भी दिख सकता है।

