DRDO Missile Project: भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में हर दिन नई इबारत लिख रहा है. इंडियन डिफेंस साइंटिस्ट ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हवा से हवा में मार करने वाली ऐसी मिसाइल को डेवलप किया है, जिसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है. चीन और पाकिस्तान जैसे देश सकते में आ गए हैं. DRDO ने खासकर इंडियन एयरफोर्स के लिए Astra MK-3 मिसाइल विकसित की है, जो एयर-टू-एयर अटैक कैपेबिलिट को कई गुना बढ़ा देगी. Astra MK-3 का इंटीग्रेशन कंप्लीट होने के बाद राफेल, Su-30MKI और तेजस जैसे फाइटर जेट की युद्धक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. इस मिसाइल को आधिकारिक तौर पर गांडीव नाम दिया गया है. यह मिसाइल भारत की वायुसेना की मारक क्षमता और रणनीतिक बढ़त को कई गुना बढ़ाने वाली मानी जा रही है. गांडीव Astra सीरीज की अब तक की सबसे उन्नत कड़ी है, जो अपने Astra MK-1 और MK-2 से कहीं अधिक घातक और सक्षम है. इस मिसाइल का इस्तेमाल नेवी द्वारा भी किया जा सकता है, लेकिन इसमें कुछ टेक्नोलॉजिकल बदलाव करने होंगे.
Astra MK-1 की मारक क्षमता जहां 80 से 110 किलोमीटर तक थी, वहीं MK-2 की रेंज 140 से 160 किलोमीटर तक पहुंच गई थी. अब गांडीव यानी Astra MK-3 के साथ भारत ने लंबी दूरी के हवा से हवा मिसाइल सेगमेंट में एक नई छलांग लगाई है. इसकी अनुमानित रेंज 300 से 350 किलोमीटर बताई जा रही है, जो इसे दुनिया की सबसे उन्नत एयर-टू-एयर मिसाइलों की कैटेगरी में ला खड़ा करती है. इससे भारतीय लड़ाकू विमान दुश्मन के विमानों को उनकी रडार सीमा से बाहर रहते हुए भी निशाना बना सकेंगे. गांडीव नामकरण भी अपने आप में प्रतीकात्मक है. महाभारत के महान धनुर्धर अर्जुन के धनुष ‘गांडीव’ की तरह यह मिसाइल भी सटीकता, शक्ति और विश्वसनीयता का प्रतीक मानी जा रही है. DRDO के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मिसाइल को अत्यधिक सटीक लक्ष्य भेदन, लंबी दूरी तक स्थिर गति बनाए रखने और आधुनिक हवाई युद्ध की जटिल परिस्थितियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है.
गांडीव मिसाइल क्या है और इसे किसने विकसित किया है?
‘गांडीव’ दरअसल Astra Mk-3 एयर-टू-एयर मिसाइल का नया नाम है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. इसका नाम महाभारत के अर्जुन के धनुष ‘गांडीव’ से प्रेरित है.
गांडीव मिसाइल की रेंज और गति कितनी है?
इस मिसाइल की मारक क्षमता करीब 340 से 350 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जो इसे दुनिया की सबसे लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों में शामिल करती है. यह मैक 4.5 तक की सुपरसोनिक गति बनाए रखने में सक्षम है.
गांडीव में कौन-सी आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की गई है?
इसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जिससे लंबी दूरी तक तेज रफ्तार और स्थिर उड़ान संभव होती है. मार्गदर्शन के लिए मिड-कोर्स इनर्शियल गाइडेंस और अंतिम चरण में एक्टिव रडार होमिंग (AESA सीकर) का उपयोग किया गया है.
गांडीव मिसाइल किन लक्ष्यों को निशाना बना सकती है?
यह मिसाइल उच्च गति से उड़ने वाले और तेजी से दिशा बदलने वाले लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है. खासतौर पर AWACS विमान, एयर टैंकर और दुश्मन के लड़ाकू विमानों को दृश्य सीमा से परे मार गिराने के लिए इसे डिजाइन किया गया है.
भारतीय वायुसेना में इसका उपयोग कैसे होगा?
गांडीव मिसाइल को भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों जैसे Su-30MKI और स्वदेशी तेजस फाइटर जेट्स के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे भारत की एयर डॉमिनेंस और स्ट्राइक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.
क्या है खासियत?
तकनीकी दृष्टि से गांडीव की सबसे बड़ी खासियत इसका सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) प्रोपल्सन सिस्टमर है. यह अत्याधुनिक तकनीक वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन का उपयोग ऑक्सीडाइज़र के रूप में करती है, जिससे मिसाइल को अपने भीतर अतिरिक्त ऑक्सीडाइज़र ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे मिसाइल का वजन कम होता है और ईंधन की दक्षता बढ़ती है. इसका सीधा फायदा यह है कि मिसाइल अधिक दूरी तक और अधिक समय तक सुपरसोनिक गति बनाए रख सकती है. SFDR सिस्टम के कारण गांडीव कथित मैक 4.5 तक की गति (5500 KMPH से ज्यादा की रफ्तार) हासिल कर सकती है. खास बात यह है कि यह गति केवल प्रारंभिक चरण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मिसाइल उड़ान के दौरान लंबे समय तक सुपरसोनिक बनी रहती है. पारंपरिक रॉकेट मोटर वाली मिसाइलों में ईंधन जलने के बाद गति घटने लगती है, लेकिन गांडीव में यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाती है.
Astra Mk-3 मिसाइल से हवा में ही दुश्मन टारगेट को ध्वस्त करना आसान हो जाएगा. (फाइल फोटो/Reuters)
रैमजेट इंजन
गांडीव की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसका थ्रॉटल-एबल रैमजेट इंजन है. सामान्य ठोस ईंधन रॉकेट मोटर एक निश्चित दर से जलते हैं और उनमें गति को नियंत्रित करने की सीमित क्षमता होती है. इसके विपरीत गांडीव का SFDR इंजन उड़ान के दौरान अपने थ्रस्ट को नियंत्रित कर सकता है. हॉट गैस फ्लो कंट्रोलर के जरिए यह मिसाइल अपनी गति और मार्ग को परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है. उदाहरण के तौर पर अंतिम चरण में यह अचानक तेज हो सकती है, ताकि दुश्मन विमान द्वारा किए गए तीखे मोड़ों और बचाव उपायों को मात दी जा सके, या फिर लंबी दूरी तक ऊर्जा बचाने के लिए गति को संतुलित रख सकती है. रणनीतिक दृष्टि से गांडीव भारतीय वायुसेना को बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) लड़ाई में निर्णायक बढ़त देगा. आधुनिक हवाई युद्ध में अक्सर मुकाबला दृश्य सीमा (Visibility Range) से बाहर ही होता है, जहां पहले हमला करने और पहले लक्ष्य भेदने की क्षमता बेहद अहम होती है. गांडीव की लंबी रेंज, हाई-स्पीड और अपडेटेड गाइडिंग सिस्टम इसे इस क्षेत्र में बेहद प्रभावी हथियार बनाती है.
एयर डिफेंस सिस्टम होगा और मजबूत
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गांडीव की तैनाती से भारत न केवल अपनी वायु रक्षा और आक्रामक क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी नई दिशा मिलेगी. यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी तकनीक के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिनके पास SFDR जैसी उन्नत मिसाइल प्रोपल्सन टेक्निक है. कुल मिलाकर, ‘गांडीव’ मिसाइल भारत की सैन्य ताकत में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है. इसकी तकनीकी खूबियां, लंबी मारक क्षमता और उच्च गति भारतीय वायुसेना को भविष्य के हवाई युद्धों के लिए कहीं अधिक सक्षम बनाएंगी. यह न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी के मानचित्र पर भारत की स्थिति को भी और सुदृढ़ करेगी.

