जशपुर जिले की इलिसीबा, जो एक राजमिस्त्री की बेटी हैं, ने दो राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर यह दिखाया है कि आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बनती. उन्होंने अपनी सफलता से साबित किया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे भी बास्केटबॉल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं.
शुरुआत स्कूल से
इलिसीबा ने बताया कि वह लगभग चार-पांच साल से बास्केटबॉल खेल रही हैं. उन्हें स्कूल में बास्केटबॉल के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने खेलना शुरू किया. शुरुआत में यह सिर्फ एक खेल था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया.
पढ़ाई और खेल का संतुलन
वर्तमान में इलिसीबा 12वीं कक्षा में पढ़ रही हैं. उनका मानना है कि खेल और पढ़ाई दोनों ही जीवन के लिए आवश्यक हैं. वह रोजाना शाम 4 बजे से 7 बजे तक अभ्यास करती हैं. अभ्यास के बाद थकान होने के बावजूद वह पढ़ाई के लिए समय निकालती हैं. उनका कहना है कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेल भी जरूरी है.
दो राष्ट्रीय पदक
इलिसीबा की कड़ी मेहनत उनके प्रदर्शन में साफ दिखती है. उन्होंने दो बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है. ये दोनों प्रतियोगिताएं राजनांदगांव में आयोजित की गई थीं. एक प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल और दूसरी में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया.
माता-पिता का पूरा सहयोग
इलिसीबा के पिता बिल्यासुस तिर्की राजमिस्त्री का काम करते हैं. उनकी मां गृहिणी हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत न होने के बावजूद, उनके माता-पिता ने इलिसीबा को खेल में पूरा सहयोग दिया. इलिसीबा बताती हैं कि अब उनके माता-पिता उन्हें पूरी तरह से समर्थन देते हैं और उन्हें खेल के लिए कहीं भी जाने की अनुमति देते हैं.
जीत ने बदला नजरिया
इलिसीबा के अनुसार, जब उन्होंने शुरुआत में खेल के लिए बाहर जाना शुरू किया तो उनके पिता देर होने और बाहर जाने को लेकर मना करते थे. हालांकि, जब वह प्रतियोगिताओं से मेडल जीतकर लौटने लगीं, तो परिवार का उन पर भरोसा बढ़ा और उन्हें पूरा समर्थन मिलने लगा.
जशपुर में सुविधाओं की कमी
इलिसीबा मूल रूप से जशपुर की रहने वाली हैं, लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई अंबिकापुर में की है. उनका कहना है कि जशपुर के जिस इलाके से वह आती हैं, वहां बास्केटबॉल के लिए बड़े शहरों जैसी सुविधाएं और कोर्ट उपलब्ध नहीं हैं. इसके बावजूद, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है.

