चैत्र माह में मिथिलांचल में एक खास परंपरा निभाई जाती है, जिसमें लोग 7 दिनों तक नीम की पत्तियों को बैंगन की भुजिया में मिलाकर खाते हैं. मान्यता है कि इस दौरान नीम कड़वा नहीं लगता, बल्कि इसका स्वाद सामान्य होता है. बुजुर्गों के अनुसार, इस परंपरा से शरीर को कई फायदे मिलते हैं. माना जाता है कि इससे चेचक, खुजली और गर्मी में होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं से बचाव होता है. तो आइए जानते हैं इसके इस्तेमाल का तरीका..


