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सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित और तकनीक से सशक्त बनाने के लिए उज्जैन में पहली बार हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा रही है. ड्रोन, अग्निशमन रोबोट, एटीवी और क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में तेजी से राहत पहुंचाएंगे. प्रशासन का लक्ष्य करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध कराना है.
धर्मनगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां अब हाईटेक होती नजर आ रही हैं. करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं. पहली बार सिंहस्थ में ड्रोन, रोबोट और अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा. जिससे भीड़ प्रबंधन, घाटों की निगरानी और आपदा की स्थिति में कार्रवाई संभव हो सकेगी. इन तकनीकों की एक झलक दशहरा मैदान में आयोजित विशेष डेमो के दौरान देखने को मिली. जहां सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में कई आधुनिक प्रयोग किए गए.
सिंहस्थ 2028 मे करोड़ो की संख्या मे श्रद्धांलु का आगमन होगा. अनुमान है कि सिंहस्थ में करीब 40 करोड़ श्रद्धालु आने की संभावना है. ऐसे में भगदड़,नदी में लोगों के डूबने की ओर कैंपों में आगजनी की भी घटनाएं हो जाती है।लेकिन भीड़ ओर सकरे रास्तों के कारण तय स्थानों पर राहत टीम समय पर नहीं पहुंच पाती. यही वजह है कि प्रशासन इस बार अत्याधुनिक तकनीक का इंतजाम करने में जुटा हुआ है.
नए तरिके से रोबोट सभालेंगा सुरक्षा
सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी क्रम में दशहरा मैदान पर अत्याधुनिक अग्नि सुरक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया गया,जहां विशेषज्ञों ने फायर कर्मियों को आपदा प्रबंधन के नए तरीके समझाए अधिकारियों ने बताया कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में कुछ मिनटों की देरी भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. यही वजह है कि इस बार ऑल टेरेन व्हीकल और क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल को आधुनिक कम्प्रेस्ड एयर फोम सिस्टम से लैस किया जाएगा. खास आकर्षण अग्निशमन रोबोट रहा, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
जमीन से आसमान तक नजर
उन्होंने ने बताया कि, सिंहस्थ मेले की सुरक्षा को हाईटेक बनाने के लिए अत्याधुनिक रोबोट और ड्रोन तकनीक का सहारा लिया जाएगा. इन रोबोटों को उन संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया जाएगा, जहां इंसानों का पहुंचना खतरे से खाली नहीं होगा. आग, धुएं या विस्फोट जैसी आपात स्थितियों में ये मशीनें राहत और बचाव कार्य में मदद करेंगी. वहीं ड्रोन पूरे मेला क्षेत्र की रियल टाइम निगरानी करेंगे, थर्मल इमेजिंग के जरिए आग की शुरुआती सूचना देंगे और किसी भी घटना का तुरंत आकलन संभव बनाएंगे.
शहर को मिलेगा फायदा
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा कि, यह आधुनिक तकनीक सिर्फ सिंहस्थ महापर्व तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे शहर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देगी. इस विशेष प्रशिक्षण से फायर टीम को अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों की जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा. महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि आस्था के इस महाकुंभ को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक से सशक्त बनाने के लिए निगम हर चुनौती से निपटने को पूरी तरह तैयार है.

