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Corruption Case : मध्य प्रदेश के सरकारी इंजीनियर के घर से करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई है. भ्रष्टाचार केस में जब्त की गई इस संपत्ति का आखिर होगा क्या. इस पर किसका मालिकाना हक रहेगा.
एमपी के सरकारी इंजीनियर के घर से करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई है. नई दिल्ली. भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी बानगी एक बार फिर मध्य प्रदेश में दिखी. जहां एक रिटायर्ड पीडब्ल्यूडी इंजीनियर के घर से छापेमारी में अकूत संपत्ति का खुलासा हुआ है. डीएसपी रैंक के अधिकारी की अगुवाई में हुई इस छापेमारी में नकदी के साथ गहने, सोने-चांदी और कई प्रॉपर्टीज को भी जब्त किया गया है. आम आदमी के जेहन में अक्सर ऐसे सवाल उठते हैं कि पुलिस और जांच एजेंसियों की ओर से जब्त किए जाने वाली इन संपत्तियों का आखिर होता क्या है. इसका मालिकाना हक किसे मिलता है.
जब्ती के लिए कौन सा कानून
देश में भ्राष्टाचार के तहत संपत्ति, गहने, कैश आदि को जब्त करने की कार्रवाई मुख्य रू पसे प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड यानी सीआरपीसी और मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट के तहत की जाती है. इस तरह की कार्रवाई सीबीआई, ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों या फिर राज्यों की भ्रष्टाचार निरोधक साखा करती है. जांच के दौरान संदिग्ध संपत्ति को सीआरपीसी की धारा 102 अथवा पीएमएलए की धारा 5 के तहत जब्त कर लिया जाता है. इन सभी संपत्तियों का वैल्यूएशन करने के बाद इन्हें बैंक अथवा जांच एजेंसी के गोदाम में सुरक्षित रख दिया जाता है.
क्या होता है जब्त किए सामान का
जब्त की गई संपत्ति को जांच एजेंसी या कोर्ट की हिरासत में रखा जाता है. जब तक मामला कोर्ट में लंबित रहता है, तब तक इन सामानों का निपटारा नहीं किया जाता है. अगर कोर्ट में आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो इन सभी संपत्तियों को सरकारी खजाने में जमा करा दिया जाता है अथवा इसे सरकार की संपत्ति घोषित कर दिया जाता है. फिर सरकार चाहे तो इसे नीलामी के जरिये बेचकर उसका मौद्रिकरण कर सकती है. इस नीलामी और जब्ती से प्राप्त पैसों का इस्तेमाल सरकारी कामकाज या लोक कल्याण में किया जाता है.
अगर आरोप सिद्ध नहीं हुए तो…
कोर्ट में भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध नहीं होने पर जब्त की गई संपत्ति वापस कर दी जाती है. लेकिन, इसके लिए आरोपी को संपत्ति अर्जित करने के स्रोत भी बताने पड़ते हैं. पीएमएलए कानून के तहत जब्त की गई संपत्ति पर भी यही प्रावधान लागू होते हैं और उसे केंद्र सरकार के खाते में जमा करा दिया जाता है. कुछ खास मामलों में जब्त किए गए वाहन आदि का उपयोग सरकारी ट्रांसपोर्ट में भी करने की छूट मिल जाती है. यह सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह जब्त किए गए सामान का दुरुपयोग न होने दे और इसका पूरा हिसाब-किताब कोर्ट के सामने पेश करे.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

