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डीजीसीए ने भारत में जाइरोप्लेन ऑपरेशन की दिशा में अहम कदम उठाया है. डीजीसीए ने जाइरोप्लेन पायलट लाइसेंस के लिए ग्राउंड और फ्लाइंग ट्रेनिंग का सिलेबस जारी किया है. नए सीएआर के तहत पायलट लाइसेंस हासिल करने वाले कैंडिडेट्स के लिए ट्रेनिंग का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तय किया गया है. डीजीसीए की तरफ से यह भारत में जाइरोप्लेन ऑपरेशंस शुरू करने की दिशा में शुरुआती कदम है.
भारत में जाइरोप्लेन ऑपरेशंस शुरू करने की दिशा में डीजीसीए ने पायलट ट्रेनिंग का नया फ्रेमवर्क जारी किया है. (एआई इमेज)
नई दिल्ली. भारत में जाइरोप्लेन के ऑपरेशन को लेकर डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने एक अहम कदम उठाया है. डीजीसीए ने जाइरोप्लेन पायलट लाइसेंस की उम्मीद रखने वाले पायलट्स के लिए ग्राउंड और फ्लाइंग ट्रेनिंग का पूरा फ्रेमवर्क जारी कर दिया है. इसके साथ ही, देश में जाइरोप्लेन से जुड़े एक नए एविएशन सेगमेंट के लिए ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग व्यवस्था शुरू करने की दिशा में रास्ता साफ कर दिया गया है.
आपको बता दें कि डीजीसीए ने सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) के सेक्शन-7, सीरीज-बी, पार्ट-XXI के तहत ‘ग्राउंड एंड फ्लाइंग ट्रेनिंग सिलेबस फॉर इश्यू ऑफ पायलट लाइसेंस फॉर जाइरोप्लेन्स’ नाम से नया नियम जारी किया है. इस सीएआर में उन कैंडिडेट्स के लिए जरूरी ट्रेनिंग फ्रेमवर्क तय किया गया है, जो जाइरोप्लेन कैटेगरी में डीजीसीए से पायलट लाइसेंस हासिल करना चाहते हैं.
इसमें ग्राउंड ट्रेनिंग के साथ-साथ फ्लाइंग ट्रेनिंग से जुड़ा सिलेबस शामिल किया गया है. यानी अब जाइरोप्लेन उड़ाने के लिए पायलट लाइसेंस हासिल करने की तैयारी करने वाले कैंडिडेट्स के लिए ट्रेनिंग का एक तय रेगुलेटरी फ्रेमवर्क करा दिया गया है.
क्या है जाइरोप्लेन?
जाइरोप्लेन एक अलग तरह का एयरक्राफ्ट है, जो सामान्य एरोप्लेन और हेलीकॉप्टर से तकनीकी तौर पर अलग होता है. इसमें एयरक्राफ्ट के ऊपर लगा रोटर स्वतंत्र रूप से घूमता है और इसी रोटर से लिफ्ट पैदा होती है. वहीं एयरक्राफ्ट को आगे बढ़ाने के लिए प्रोपेलर से थ्रस्ट मिलता है. इस तरह जाइरोप्लेन में रोटर और प्रोपेलर अलग-अलग भूमिका निभाते हैं. इसकी यही तकनीकी बनावट इसे सामान्य फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट से अलग बनाती है.
किन कामों में इस्तेमाल हो सकता है जाइरोप्लेन?
जाइरोप्लेन का इस्तेमाल सिर्फ रीक्रिएशनल फ्लाइंग तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल जॉयराइड और एयर एक्सपीरियंस फ्लाइट जैसी एक्टिविटीज में किया जा सकता है. इसके अलावा जाइरोप्लेन का इस्तेमाल कई तरह के एरियल वर्क में भी किया जा सकता है. इनमें एग्रीकल्चर में स्प्रेइंग, बैनर टोइंग, सर्विलांस और सर्वे जैसे काम शामिल हैं. इस वजह से जाइरोप्लेन के लिए रेगुलेटेड पायलट ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क तैयार किया जाना एविएशन सेक्टर के लिए अहम कदम है.
भारत में नए एविएशन सेगमेंट की शुरुआत
डीजीसीए के अनुसार, नया सीएआर जारी होना भारत में जाइरोप्लेन को एविएशन इकोसिस्टम में शामिल करने और इनके ऑपरेशन की शुरुआत की दिशा में शुरुआती कदम है. अब इसके बाद इस सेगमेंट को आगे बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशंस की स्थापना, जाइरोप्लेन के मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली की कैपेसिटी डेवलप करने जैसे कदम अहम होंगे. इससे भारत में जाइरोप्लेन से जुड़े ट्रेनिंग, ऑपरेशंस और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को डेवलप करने का बेस तैयार किया जा सकेगा.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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