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Home » All News » भारत को घेर रहे हैं ये तीन दुश्मन…हिंद-प्रशांत में कुछ तो पक रहा है, अमेरिका का क्वॉड होगा फेल! – china pakistan bangladesh axis in indo pacific what does usa and quad
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भारत को घेर रहे हैं ये तीन दुश्मन…हिंद-प्रशांत में कुछ तो पक रहा है, अमेरिका का क्वॉड होगा फेल! – china pakistan bangladesh axis in indo pacific what does usa and quad

HawkNewsBy HawkNewsJuly 2, 2025No Comments6 Mins Read
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नवभारतटाइम्स.कॉम•2 Jul 2025, 8:05 pm

अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति चीन के प्रभाव को कम करना चाहती है। अमेरिका चाहता है कि वो इस क्षेत्र के देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए। लेकिन, चीन की एक नई स्ट्रैटेजी इंडो-प्रशांत में क्वॉड के मकसद को फेल करना चाहती है।

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भारत के पड़ोस में एक खतरनाक एक्सिस बन रहा है। इसे बेहद गुपचुप तरीके से बनाया जा रहा है। इस एक्सिस से पूरे दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता भंग हो सकती है। यह मीटिंग 19 जून, 2025 में चीन के यून्नान प्रांत की राजधानी कुनमिंग में हुई थी। भारत के तीन दुश्मन एक खतरनाक प्लान पर काम कर रहे हैं, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। हिंद-प्रशांत महासागर को लेकर यह मीटिंग भारत के साथ-साथ अमेरिका और क्वॉड के लिए भी खतरे की घंटी है। जानते हैं पूरी कहानी।

किस-किस ने इस मीटिंग में लिया हिस्सा, जान लीजिए

इस सीक्रेट मीटिंग में चीन के उप विदेश मंत्री सन वेईडोंग, बांग्लादेश के एक्टिंग विदेश सचिव रुहुल आलम सिद्दीक और पाकिस्तान के एडिशनल विदेश सचिव इमरान अहमद सिद्दीकी शामिल हुए। पाकिस्तान की विदेश सचिव आमना बलोच भी वीडियो के जरिए मीटिंग के पहले हिस्से में शामिल हुईं। यह जानकारी चीन के विदेश मंत्रालय ने दी।

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मीटिंग में क्या पक रहा है, बेहद सीक्रेट

यह त्रिकोणीय पहल चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की पहले की पहल की तरह ही है, लेकिन इस बार यह कुनमिंग में हो रही है। भारत के रिश्ते पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ ठीक नहीं हैं। बांग्लादेश के साथ भी रिश्ते खराब हो रहे हैं, क्योंकि वहां मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार है. इससे पता चलता है कि इस मीटिंग के पीछे कुछ रणनीतिक इरादे हैं। मीटिंग के बाद जारी बयान में कहा गया है कि यह पहल किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है। हम सच्चे बहुपक्षवाद और खुले क्षेत्रीयता पर आधारित है, मगर असलियत कुछ और ही है।

पाक ने जारी किया बयान तो बांग्लादेश बोला-यह विश्वासघात

बांग्लादेश शुरू में कुनमिंग मीटिंग के बारे में बताने से हिचकिचा रहा था। उसने चीन से कहा था कि वह प्रेस स्टेटमेंट पहले दिखाए। इससे पता चलता है कि बांग्लादेश सतर्क है और उसे पता है कि इस मीटिंग से विवाद हो सकता है। वहीं, पाकिस्तान ने अपना स्टेटमेंट खुद ही जारी कर दिया। कुछ बांग्लादेशी अधिकारियों ने इसे विश्वासघात बताया। इससे पता चलता है कि इस त्रिकोणीय ढांचे में कुछ तो पक रहा है।

समंदर को लेकर हुआ ये समझौता, जानना जरूरी

यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस ने चीन के साथ रिश्ते बढ़ाए हैं और पाकिस्तान के साथ समुद्री संपर्क फिर से शुरू किया है. लेकिन इन फैसलों पर संसद में कोई बहस नहीं हुई है। ऐसे में लोगों को लगता है कि जब तक चुनाव नहीं होते, तब तक इन फैसलों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कुनमिंग मीटिंग में कई मुद्दों पर बात हुई। जैसे कि व्यापार, औद्योगिक संयुक्त उद्यम, डिजिटल कनेक्टिविटी, समुद्री लॉजिस्टिक्स, कृषि सहयोग, जलवायु कार्रवाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क। इन सभी क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाया गया। इससे पता चलता है कि इस त्रिकोणीय सहयोग को ठोस रूप देने की योजना है।

चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर को पूर्व तक बढ़ाने पर बात

सबसे जरूरी बात यह है कि इस मीटिंग में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को पूर्व की ओर बढ़ाने पर भी बात हुई। इससे रणनीतिक रूप से काफी असर पड़ सकता है। हालांकि, इस बारे में ज्वाइंट स्टेटमेंट में कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन खबरों के मुताबिक चीन CPEC को बांग्लादेश के इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क से जोड़ना चाहता है। इसके लिए सड़क, रेल और समुद्री संपर्क बढ़ाया जा सकता है।

भारत ने इसीलिए CPEC का विरोध

भारत को पूर्व की ओर CPEC के विस्तार पर ऐतराज है। भारत ने CPECका विरोध किया है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) से होकर गुजरता है। PoJK का अभिन्न हिस्सा है। अगर CPEC को पूर्व की ओर बांग्लादेश तक बढ़ाया जाता है, तो इससे भारत के पड़ोस में चीन का दबदबा बढ़ जाएगा। इससे भारत के रणनीतिक और क्षेत्रीय हितों को भी खतरा होगा और इलाके में तनाव बढ़ सकता है। यह त्रिकोणीय सहयोग भारत के लिए एक चुनौती है।

चीन को ज्यादा फायदा, भारत को नुकसान

चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के एक्सिस से SAARC, BIMSTEC और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) जैसे क्षेत्रीय संगठनों में भारत की भूमिका कम हो सकती है। अगर इस त्रिकोणीय सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाता है, तो इससे दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का प्रभाव कम हो सकता है।

चीन तीनों तरफ से भारत को घेर रहा है

इस पहल के जरिए चीन को दो तरफ से फायदा होगा। पूर्व में उसे बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश के समुद्री प्लेटफार्मों तक पहुंच मिलेगी और पश्चिम में उसे पाकिस्तान के बंदरगाहों और इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच मिलेगी। इससे भारत चारों तरफ से घिर सकता है और उसकी रणनीतिक गहराई कम हो सकती है।चीन आर्थिक ताकत, रक्षा कूटनीति और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जरिए क्षेत्रीय व्यवस्था को बदलना चाहता है और भारत के नेतृत्व को चुनौती देना चाहता है।

एक्सपर्ट ने कहा, बांग्लादेश-पाक पर निशाना

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये एक्सिस चीनी रणनीतिक घेराबंदी के एक व्यापक पैटर्न के अनुरूप हैं, जो नागरिक कनेक्टिविटी के बहाने भारत के पूर्वी और पश्चिमी किनारों बांग्लादेश और पाकिस्तान के माध्यम से उसकी संकीर्ण कमजोरियों को टार्गेट करते हैं, जिसे संभावित रूप से सैन्य लाभ में बदला जा सकता है। इस त्रिकोणीय पहल का असर सिर्फ भारत पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि इसका असर पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर पड़ेगा।

अमेरिका के मंसूबों पर भी फिरेगा पानी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर चीन इस सहयोग को संस्थागत बनाने में सफल हो जाता है, तो इससे अमेरिकी इंडो-पैसिफिक रणनीति को चुनौती मिलेगी। अमेरिका का मकसद इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखना और एक स्वतंत्र और खुला क्षेत्र सुनिश्चित करना है। दक्षिण एशिया में चीन के नेतृत्व वाला ढांचा अमेरिकी रणनीतिक स्थान को कम कर देगा और वाशिंगटन के प्रभाव को कम कर देगा।

अमेरिका और क्वॉड को चुनौती दे रहा है नया एक्सिस

चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच एक नया समीकरण बन रहा है। इसे चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश एक्सिस कहा जा रहा है। कुछ लोगों को लगता है कि ये तीनों देश मिलकर भारत के दबदबे को कम करना चाहते हैं। साथ ही, ये अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वाड (Quad) को भी चुनौती दे सकते हैं। क्वाड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। क्वाड (Quad) का मकसद है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र खुला रहे। लेकिन चीन और पाकिस्तान की गतिविधियां बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जैसे इलाकों में बढ़ रही हैं। इससे क्वाड (Quad) के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।