Shiv Ji Ke Putra: सनातन धर्म में भगवान शिव को सृष्टि के संहारक और देवों के देव महादेव कहा गया है. अक्सर भगवान शिव के दो पुत्र श्रीगणेश और भगवान कार्तिकेय का ही सबसे अधिक उल्लेख मिलता है. हालांकि, शिव पुराण, स्कंद पुराण, लिंग पुराण, क्षेत्रीय परंपराओं और लोक मान्यताओं में शिव के अन्य पुत्रों का भी वर्णन मिलता है. इनमें कुछ को प्रत्यक्ष पुत्र, कुछ को अंशावतार और कुछ को विशेष परिस्थितियों में उत्पन्न संतान के रूप में माना गया है. यही कारण है कि अलग-अलग परंपराओं में महादेव के आठ पुत्रों का उल्लेख भी मिलता है. आइए जानते हैं शिवजी के पुत्रों के नाम…
1. भगवान श्रीगणेश
श्रीगणेश भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र माने जाते हैं. उन्हें प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता का स्थान प्राप्त है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से की जाती है.
2. भगवान कार्तिकेय
कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद, मुरुगन और षडानन भी कहा जाता है, देवताओं की सेना के सेनापति हैं. उन्होंने तारकासुर का वध कर देवताओं को विजय दिलाई थी. दक्षिण भारत में उनकी विशेष पूजा होती है.
3. सुकेश
कुछ पौराणिक कथाओं में सुकेश को भगवान शिव का पुत्र बताया गया है. कहा जाता है कि उन्होंने शिव की कठोर तपस्या कर दिव्य शक्तियां प्राप्त की थीं. उनका उल्लेख सीमित ग्रंथों और लोककथाओं में मिलता है.
4. जलंधर
शिव पुराण के अनुसार जलंधर का जन्म भगवान शिव के तेज से हुआ था. बाद में वह एक पराक्रमी असुर राजा बना. यद्यपि उसका जन्म शिव के तेज से हुआ, इसलिए कुछ परंपराएं उसे शिव-पुत्र के रूप में भी स्वीकार करती हैं.
5. अय्यप्पा (हरिहरपुत्र)
दक्षिण भारतीय परंपरा में भगवान अय्यप्पा को हरिहरपुत्र कहा जाता है. उनका जन्म भगवान शिव और भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप के संयोग से माना जाता है. केरल के सबरीमला मंदिर में उनकी विशेष पूजा होती है.
6. भौम (मंगल)
कुछ पौराणिक मान्यताओं में मंगल ग्रह के अधिदेव भौम को भगवान शिव के पसीने या तेज से उत्पन्न माना गया है. इसी कारण कुछ ग्रंथों में उन्हें शिव के अंश से उत्पन्न पुत्र बताया गया है.
7. अंधक
अंधकासुर का जन्म भी कुछ कथाओं में भगवान शिव के शरीर से निकले पसीने की बूंदों से बताया गया है. बाद में वह असुर बन गया, लेकिन अंततः भगवान शिव ने उसका उद्धार किया. कुछ परंपराओं में उसे शिव का पुत्र माना गया है.
8. कुज (मंगल का एक अन्य नाम)
कुछ क्षेत्रीय और पौराणिक परंपराओं में कुज या अंगारक का उल्लेख भौम के रूप में ही मिलता है, जबकि कुछ मान्यताओं में इसे अलग स्वरूप मानकर शिव के अंश से उत्पन्न पुत्र की संज्ञा दी गई है.

