भारत के ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की ताकत पर फिलीपींस फिदा हो चुका है. वह दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और दखलंदाजी को रोकने के लिए अब भारत से और ज्यादा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें खरीदना चाहता है. इसके लिए उसने भारत के सामने अपनी जरूरतों की एक खास लिस्ट भी रखी है, ताकि मिसाइल सिस्टम को फिलीपींस की भौगोलिक परिस्थितियों और सैन्य ढांचे के मुताबिक तैयार किया जा सके. इस संभावित सौदे की कीमत 700 से 800 मिलियन डॉलर यानी करीब 6,200 से 7,100 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
भारत से 60 और ब्रह्मोस मिसाइलें खरीदने की तैयारी
EurAsian Times की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो टियोडोरो ने 4 नवंबर को तीसरे दिल्ली डिफेंस डायलॉग में ब्रह्मोस की खरीद को लेकर अपनी मंशा जाहिर की. उन्होंने कहा कि उनका देश ब्रह्मोस यूनिट्स की संख्या बढ़ाना चाहता है. इसके लिए फिलीपींस ने भारत के अधिकारियों को अपनी जरूरतों और संभावित बदलावों की सूची भी सौंपी है.
रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस करीब पांच और ब्रह्मोस सिस्टम खरीद सकता है. इनमें लगभग 60 मिसाइलें शामिल हो सकती हैं. इस संभावित सौदे का मूल्य 700 से 800 मिलियन डॉलर आंका गया है. यानी भारत के रक्षा निर्यात के लिहाज से यह एक बड़ा समझौता साबित हो सकता है.
पहले ही खरीद चुका है ब्रह्मोस की तीन बैटरियां
फिलीपींस और भारत के बीच ब्रह्मोस को लेकर रक्षा साझेदारी पहले से मौजूद है. साल 2022 में मनीला ने भारत के साथ 375 मिलियन डॉलर का समझौता किया था. इसके तहत फिलीपींस ने अपनी नौसेना के लिए ब्रह्मोस मिसाइल के तट आधारित एंटी-शिप वेरिएंट की तीन बैटरियां खरीदी थीं.
इस खरीद का मकसद दक्षिण चीन सागर में चीन की चुनौती का मुकाबला करना और अपने समुद्री अधिकारों की रक्षा करना था. अब अतिरिक्त मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना से साफ है कि फिलीपींस अपनी तटीय रक्षा में ब्रह्मोस की भूमिका को और मजबूत करना चाहता है.
चीन की टेंशन बढ़ाने वाला प्लान क्या है?
दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच समुद्री अधिकारों को लेकर लंबे समय से तनाव है. चीन इस समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि फिलीपींस अपने समुद्री अधिकारों और संप्रभुता की रक्षा के लिए सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है.
EurAsian Times की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीपींस अब ब्रह्मोस को सिर्फ एक मिसाइल सिस्टम के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि इसे अपनी तटीय रक्षा और लंबी दूरी तक हमला करने की रणनीति का हिस्सा बना रहा है. ब्रह्मोस की तैनाती से फिलीपींस को समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों को दूर से निशाना बनाने और संभावित हमले को रोकने की क्षमता मिलेगी.
फिलीपींस सरकार ने पश्चिमी लूजोन के जाम्बालेस इलाके में स्थित फिलीपीन नेवल स्टेशन लियोविगिल्डो गैंटियोक्वी में ब्रह्मोस मिसाइलों के लिए एक साइट भी तैयार की है. यह तैनाती दक्षिण चीन सागर के रणनीतिक लिहाज से अहम क्षेत्र में फिलीपींस की रक्षा तैयारियों को मजबूत करती है.
अमेरिका के साथ ब्रह्मोस हमले की रणनीति का अभ्यास
फिलीपींस केवल मिसाइलें खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी इस्तेमाल की रणनीति पर भी काम कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में अमेरिका और फिलीपींस की मरीन फोर्स ने समुद्री हमले से जुड़ा एक संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था.
इस दौरान ड्रोन और जमीन से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइलों की मदद से समुद्र में मौजूद काल्पनिक दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया. इसमें ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के संभावित इस्तेमाल को भी सिमुलेट किया गया. इस तरह के अभ्यास में लक्ष्य की पहचान से लेकर उस पर मिसाइल हमला करने तक की पूरी प्रक्रिया को ‘किल चेन’ कहा जाता है.
मैक-3 की रफ्तार, दुश्मन के लिए रोकना आसान नहीं
ब्रह्मोस भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ्तार और सटीक निशाना लगाने की क्षमता है. यह आवाज की गति से करीब तीन गुना यानी मैक-3 की रफ्तार से उड़ सकती है.
इसे जमीन, युद्धपोत और लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जा सकता है. इसकी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता, कम रडार दृश्यता और तेज गति इसे दुश्मन के लिए चुनौतीपूर्ण लक्ष्य बनाती है. खासतौर पर समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए इसका एंटी-शिप वेरिएंट बेहद अहम है.
चीन से सैन्य मुकाबले में फिलीपींस का ब्रह्मोस पर भरोसा
सैन्य ताकत के मामले में फिलीपींस चीन से काफी पीछे है. ऐसे में ब्रह्मोस जैसी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल उसके लिए असमान सैन्य मुकाबले में रणनीतिक बढ़त हासिल करने का जरिया बन सकती है. इसे सैन्य भाषा में एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) रणनीति कहा जाता है, जिसका मकसद विरोधी सेना को किसी खास समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करने या वहां स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने से रोकना है.
फिलीपींस के पूर्व रक्षा सचिव डेल्फिन लोरेन्जाना भी कह चुके हैं कि ब्रह्मोस मिसाइलें देश की संप्रभुता और समुद्री अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करेंगी. वहीं, मौजूदा रक्षा सचिव टियोडोरो इसे समुद्री सुरक्षा के लिए ‘गेमचेंजर’ बता चुके हैं.
भारत से अतिरिक्त ब्रह्मोस सिस्टम खरीदने की फिलीपींस की योजना इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. हालांकि, 60 मिसाइलों और 700-800 मिलियन डॉलर के संभावित सौदे को लेकर अभी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है. अगर यह खरीद आगे बढ़ती है, तो इससे भारत-फिलीपींस रक्षा साझेदारी और मजबूत होगी और दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकती है.

