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कच्छ के रण में भारत विरोधी साजिशें रचने और भारतीय संप्रभुता को चुनौती देने वाले दुश्मनों को उनकी ही मांद में ढेर करने के लिए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने सरहद पर एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर लिया है. भारत-पाकिस्तान सीमा पर सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील सर क्रीक सेक्टर में पाकिस्तान की हर नापाक हरकत को मलबे में तब्दील करने के लिए सरकार ने 11 स्वदेशी, हाई-स्पीड एम्फिबियस कॉम्बैट बोट्स को खरीदने की प्रक्रिया को हरी झंडी दिखा दी है.
सर क्रीक में दुश्मनों की नापाक हरकतों को कुचलने के लिए तैनात होंगे 11 घातक एम्फिबियस बोट. (सांकेतिक तस्वीर)
नई दिल्ली. ‘कच्छ के दुर्गम और दलदली मुहाने पर भारत विरोधी साजिशें रचने वाले दुश्मनों को उनकी ही मांद में नेस्तनाबूद करने के लिए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने सरहद पर एक अभेद्य और बेहद आक्रामक मिलिट्री ग्रिड तैनात करने का अंतिम फैसला ले लिया है’. न्यूज18 की एक बेहद संवेदनशील रिपोर्ट के अनुसार, भारत-पाकिस्तान सीमा पर सामरिक रूप से सबसे नाजुक माने जाने वाले सर क्रीक सेक्टर में भारतीय संप्रभुता को चुनौती देने वाले हर एक नापाक हाथ को काटने के लिए सरकार ने 11 स्वदेशी, हाई-स्पीड एम्फिबियस कॉम्बैट बोट्स (जल-थल दोनों जगह काम करने वाले लड़ाकू जहाजों) की खरीद प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है.
यह आक्रामक कदम पाकिस्तान की उस कायराना हरकत का करारा जवाब है, जिसके तहत पिछले साल पाकिस्तानी सेना ने भारतीय बुनियादी ढांचे को ड्रोन हमलों से निशाना बनाने का दुस्साहस किया था. हालिया खुफिया इनपुट्स से यह साफ हुआ है कि पाकिस्तान इस विवादित दलदली इलाके में अपने सैनिकों का जमावड़ा और बुनियादी ढांचा तेजी से बढ़ा रहा है, जिसे समय रहते कुचलने के लिए भारत ने अपनी मारक क्षमता को दोगुना कर दिया है.
थलवेग सिद्धांत की हुंकार: क्यों सुलग रहा है सर क्रीक?
1947 के विभाजन के समय से ही सर क्रीक का यह इलाका भारत और पाकिस्तान के बीच एक सुलगता हुआ घाव बना हुआ है, जब सिंध पाकिस्तान के हिस्से चला गया और गुजरात भारत का गौरव बना रहा. हालांकि 1968 के ट्रिब्यूनल अवॉर्ड ने कच्छ के अधिकांश सीमा विवाद को सुलझा दिया था, लेकिन सर क्रीक का यह मुहाना कई दौर की वार्ताओं के बाद भी अनसुलझा रहा.
इस विवाद की जड़ 1914 के एक पुराने प्रस्ताव की व्याख्या में छिपी है. पाकिस्तान पूरे क्रीक पर अपना हक जताता है और पूर्वी तट को सीमा मानता है, जबकि भारत ‘थलवेग सिद्धांत’ (Thalweg Principle) के तहत अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार नौगम्य चैनल के बिल्कुल मध्य से सीमा तय करने की वकालत करता है. पाकिस्तान इस सिद्धांत को यह कहकर खारिज करने की नाकाम कोशिश करता है कि यह एक ज्वारीय मुहाना है, कोई नदी नहीं. लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सीमाओं की रक्षा के लिए नक्शे और ऐतिहासिक बाउंड्री मार्कर ही अंतिम सत्य हैं.
ग्लोबल मिलिट्री क्लब में भारत की धाक: उथले पानी के शहंशाह
उथले पानी, कीचड़, और दलदली मैदानों में सेना को त्वरित और घातक गतिशीलता देने वाले इन एम्फिबियस लड़ाकू विमानों और होवरक्राफ्ट्स के इस्तेमाल में भारत अब दुनिया की महाशक्तियों के समकक्ष खड़ा हो गया है. वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, दक्षिण कोरिया, जापान और खुद पाकिस्तान भी अपनी तटीय सीमाओं और नदी डेल्टाओं की सुरक्षा के लिए इस तरह की विशिष्ट क्षमताओं का इस्तेमाल करते हैं. भारत द्वारा इन 11 हाई-स्पीड स्वदेशी बोट्स की तैनाती के बाद सर क्रीक का पूरा डेमोग्राफी भारत के पूर्ण नियंत्रण में आ जाएगा, जहां दलदल के रास्ते घुसपैठ करने वाले किसी भी पाकिस्तानी आतंकी या सैनिक के लिए मौत निश्चित होगी.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

