Last Updated:
Loan-Deposit Ratio in Bank : एसबीआई ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि बैंकों के लोन और जमा का अनुपात बढ़कर 82 फीसदी पहुंच गया है. यह अर्थव्यवस्था में बढ़ती लोन की डिमांड को दिखाता है, लेकिन जमाओं में सुस्ती एक जोखिम का इशारा भी है.
बैंकों के जमा और लोन का अनुपात काफी बढ़ गया है. नई दिल्ली. अर्थव्यवस्था के बढ़ते वित्तीयकरण के साथ देश का कर्ज और जमा अनुपात लगातार बढ़ रहा है और यह वित्त वर्ष 2000-01 के 53 फीसदी से बढ़कर 15 दिसंबर, 2025 तक 82 फीसदी पर पहुंच गया. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की सोमवार को जारी एक शोध रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्ज एवं जमा (सीडी) अनुपात में यह सुधार बेहतर वित्तीय विकास को दर्शाता है और मजबूत आर्थिक वृद्धि का संकेत देता है.
रिपोर्ट कहती है कि वृद्धिशील सीडी अनुपात के आंकड़े कई बार 100 फीसदी से ऊपर चले गए हैं, जो जमा वृद्धि अपेक्षाकृत कमजोर रहने के बावजूद ऋण की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं. बैंकों ने अन्य स्रोतों से संसाधन जुटाकर कर्ज की इस मांग को पूरा किया. एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड महामारी के बाद भारतीय बैंकों के बहीखातों में मजबूत सुधार देखने को मिला है. बैंक परिसंपत्तियों की वृद्धि बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 94 फीसदी तक पहुंच गई है, जो वित्तवर्ष 2020-21 में 77 फीसदी थी. यह कर्ज मध्यस्थता और वित्तीय गहराई में बढ़ोतरी को दर्शाता है.
20 साल में बदल गया माहौल
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में जमा और कर्ज में कई गुना वृद्धि हुई है. वित्त वर्ष 2004-05 से 2024-25 के दौरान जमा 18.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऋण 11.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इस दौरान कर्ज वृद्धि की रफ्तार अधिक रही, जिसके चलते कर्ज एवं जमा अनुपात वित्तवर्ष 2020-21 के 69 फीसदी से बढ़कर वित्तवर्ष 2024-25 में 79 फीसदी हो गया. वैसे तो लोन की बढ़ती डिमांड तेज आर्थिक ग्रोथ का संकेत देती है, लेकिन जमाओं में आई सुस्ती एक जोखिम का संकेत देती है.
सरकारी बैंकों की बढ़ रही हिस्सेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की बाजार हिस्सेदारी में अब धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है, जो बहीखाते में सुधार और नए कर्ज देने की क्षमता को दर्शाता है. वहीं, चालू और बचत खाते का कुल अनुपात करीब 37 फीसदी पर स्थिर रहा. हालांकि, निजी बैंकों ने इस खंड में अपनी हिस्सेदारी मजबूत की, जबकि विदेशी बैंकों में इसमें गिरावट आई. एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि असुरक्षित कर्ज 2004-05 के दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 46.9 लाख करोड़ रुपये हो गया और कुल कर्ज में इसकी हिस्सेदारी 17.7 फीसदी से बढ़कर 24.5 फीसदी हो गई है.
बैंकिंग सेक्टर में बढ़ा रोजगार
रोजगार के मोर्चे पर बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या दो दशकों में लगभग दोगुनी होकर 8.6 लाख से बढ़कर 18.1 लाख हो गई है. इसमें निजी बैंकों की हिस्सेदारी 46 फीसदी जबकि सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 42 फीसदी है. वहीं, बैंक अधिकारियों की हिस्सेदारी 36 फीसदी से बढ़कर 76 फीसदी हो गई है, जो बैंकिंग क्षेत्र में कौशल-आधारित भूमिकाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकों की कुल परिसंपत्तियां वित्तवर्ष 2004-05 के 23.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तवर्ष 2024-25 में 312.2 लाख करोड़ रुपये हो गईं.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

