पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने मंगलवार को अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर चुनावी बिगुल फूंक दिया. 71 सीटों की इस सूची में पार्टी ने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों का ऐसा मिश्रण पेश किया है जो न सिर्फ उसके संगठनात्मक आत्मविश्वास को दिखाता है, बल्कि राज्य की जातिगत और सामाजिक राजनीति की बारीक समझ को भी उजागर करता है. सूची के ज़रिए भाजपा ने यह साफ संकेत दिया है कि वह इस बार केवल पारंपरिक वोट बैंक पर नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मैदान में उतर रही है.
| विधानसभा सीट/ भाजपा के प्रत्याशी | विधानसभा सीट/ भाजपा के प्रत्याशी |
| 1. बेतिया – रेणु देवी 2. रक्सौल – प्रमोद कुमार सिन्हा 3. पिपरा – श्यामबाबू प्रसाद यादव 4. मधुबन – राणा रणधीर सिंह 5. मोतिहारी – प्रमोद कुमार 6. ढाका – पवन जायसवाल 7. रीगा – बैद्यनाथ प्रसाद 8. बथनाहा – अनिल कुमार राम 9. परिहार – गायत्री देवी 10. सीतामढ़ी – सुनील कुमार पिंटू 11. बेनीपट्टी – विनोद नारायण झा 12. खजौली – अरुण शंकर प्रसाद 13. बिस्फी – हरिभूषण ठाकुर बचौल 14. राजनगर – सुजीत पासवान 15. झंझारपुर – नीतीश मिश्रा 16. छातापुर – नीरज कुमार बबलू 17. नरपतगंज – देवंती यादव 18. फारबिसगंज – विद्या सागर केसरी |
19. सिकटी – विजय कुमार मंडल 20. किशनगंज – स्वीटी सिंह 21. बनमनखी – कृष्ण कुमार 22. पूर्णिया – विजय कुमार खेमका 23. कटिहार – तारकिशोर प्रसाद 24. प्राणपुर – निशा सिंह 25. कोढ़ा – कविता देवी 26. सहरसा – आलोक रंजन झा 27. गौरा-बौराम – सुजीत कुमार सिंह 28. दरभंगा – संजय सरावगी 29. केवटी – मुरारी मोहन झा 30. जाले – जिबेश कुमार मिश्रा 31. औराई – रमा निषाद 32. कुढ़नी – केदार प्रसाद गुप्ता 33. बरुराज – अरुण कुमार सिंह 34. साहेबगंज – राजू कुमार सिंह 35. बैकुंठपुर – मिथिलेश तिवारी 36. सीवान – मंगल पांडेय |
वरिष्ठ और युवा नेताओं कॉम्बिनेशन
सूची में दोनों उपमुख्यमंत्रियों और कई वरिष्ठ नेताओं को जगह मिली है, लेकिन कुछ पुराने और प्रतिष्ठित चेहरों को इस बार टिकट नहीं मिला. भाजपा ने अनुभव और नई राजनीतिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. सूची में महिलाओं और युवा नेताओं को स्थान दिया गया है और ‘कास्ट-कंसोलिडेशन’ पर फोकस साफ दिखाई देता है. पार्टी ने उन जिलों और सीटों पर भरोसेमंद चेहरे पर विश्वास जताया है जहां उसकी पकड़ मजबूत है.
क्या कहती है भाजपा की यह सूची?
भाजपा ने कुछ स्थिर और अनुभवी नेताओं को टिकट देकर बोर्ड पर अनुभव बनाए रखा है, जबकि कुछ नए और स्थानीय प्रभाव वाले चेहरों को चुना है ताकि जमीनी लड़ाई में स्थानीय कनेक्ट मज़बूत रहे. बिहार में चुनावी जीत जाति-आधारित गठजोड़ से जुड़ी रहती है और इस सूची में भाजपा ने ऐसे उम्मीदवार चुने हैं जो स्थानीय जातिगत समीकरण को ठीक प्रकार से टारगेट करते हैं.
| विधानसभा सीट/ भाजपा के प्रत्याशी | विधानसभा सीट/ भाजपा के प्रत्याशी |
| 37. दरौंदा – कर्णजीत सिंह 38. गोरेयाकोठी – देवेशकांत सिंह 39. तरैया – जनक सिंह 40. अमनौर – कृष्ण कुमार मंटू 41. हाजीपुर – अवधेश सिंह 42. लालगंज – संजय कुमार सिंह 43. पातेपुर – लखेन्द्र कुमार रौशन 44. मोहिउद्दीननगर – राजेश कुमार सिंह 45. बछवारा – सुरेन्द्र मेहता 46. तेघरा – रजनीश कुमार 47. बेगूसराय – कुंदन कुमार 48. भागलपुर – रोहित पांडेय 49. बांका – राम नारायण मंडल 50. कटोरिया – पूरण लाल टुडू 51. तारापुर – सम्राट चौधरी 52. मुंगेर – कुमार प्रणय 53. लखीसराय – विजय कुमार सिन्हा 54. बिहारशरीफ – डॉ. सुनील कुमार |
55. दीघा – संजीव चौरसिया 56. बांकीपुर – नितिन नबीन 57. कुम्हरार – संजय गुप्ता 58. पटना साहिब – रत्नेश कुशवाहा 59. दानापुर – रामकृपाल यादव 60. बिक्रम – सिद्धार्थ सौरव 61. बड़हरा – राघवेन्द्र प्रताप सिंह 62. आरा – संजय सिंह ‘टाइगर’ 63. तरारी – विशाल प्रशांत 64. अरवल – मनोज शर्मा 65. औरंगाबाद – त्रिविक्रम सिंह 66. गुरुआ – उपेन्द्र दांगी 67. गया शहर – डॉ. प्रेम कुमार 68. वजीरगंज – बीरेन्द्र सिंह 69. हिसुआ – अनिल सिंह 70. वारसलीगंज – अरुणा देवी 71. जमुई – श्रेयसी सिंह |
बिहार के सभी समाजों का प्रतिनिधित्व
पुराने चेहरों पर भरोसा, नये को मौका
नये चेहरों पर भाजपा का बड़ा दांव
मजबूत जमीन पर बदलाव का संकेत
भाजपा की यह पहली सूची साफ तौर पर बताती है कि पार्टी का मकसद केवल सीट जीतना नहीं बल्कि जातिगत गणित, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक ऊर्जा को एक साथ साधना है. पुराने चेहरों के साथ नए नामों को मौका देना एक तरफ बदलाव का संकेत है तो दूसरी ओर भरोसेमंद चेहरों के जरिए मजबूत चुनावी जमीन तैयार करने की रणनीति भी. आने वाले दिनों में जब अन्य सहयोगी दल और विपक्षी गठबंधन अपनी सूचियां जारी करेंगे, तब इस लिस्ट की रणनीतिक अहमियत और भी स्पष्ट होगी. लेकिन, फिलहाल भाजपा ने यह दिखा दिया है कि उसने चुनावी बिसात पर पहली चाल सोच-समझकर चली है.

