India-Japan Relation: जापान की पीएम सनाए ताकाइची आज से भारत के दौरे पर हैं. जापानी पीएम को पहले दिल्ली की जगह गुवाहाटी आने था ताकि जापान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से अपने सम्बन्धों को अपनी रणनीति के तहत और मजबूत कर सके. दरअसल, भारत के नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र को जापान अपनी ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP)’ रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र मान रहा है. जापान का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक रणनीतिक सेतु है. यह भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और जापान की इंडो-पैसिफिक दृष्टि को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभा रहा है.
जनवरी 2026 में भारत-जापान विदेश मंत्रियों की रणनीतिक वार्ता हुई थी. इस बैठक में दोनों देशों ने पूर्वोत्तर भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई थी. इसके तहत इंडिया-जापान एक्ट ईस्ट फोरम को और सक्रिय बनाने और बौद्धिक संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया गया.
पिछले डेढ़ वर्ष में जापान और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों में उल्लेखनीय तेजी आई है. जापान के विदेश राज्य मंत्री इवाओ होरी ने फरवरी 2026 में मेघालय और असम का दौरा कर कहा था कि पूर्वोत्तर भारत वह क्षेत्र है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और जापान की ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ परिकल्पना का वास्तविक क्रियान्वयन हो रहा है.
इसी अवधि में मेघालय, असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने जापान का दौरा किया. इन यात्राओं के दौरान कौशल विकास, रोजगार, कृषि, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े कई समझौते हुए. मेघालय ने पांच वर्षों में 5,000 युवाओं को जापान में प्रशिक्षण और रोजगार दिलाने का समझौता किया, जबकि असम ने 20,000 युवाओं के कौशल विकास के लिए करार किया.
सेमीकंडक्टर और निवेश पर बढ़ा फोकस
इंडो-पैसिफिक सहयोग के तहत आर्थिक साझेदारी भी तेजी से मजबूत हो रही है. टोक्यो इलेक्ट्रॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने भारत के पहले सेमीकंडक्टर फैब और असम के जागीरोड स्थित असेंबली एवं टेस्टिंग संयंत्र के लिए तकनीकी सहयोग का समझौता किया है. असम के नगरबेरा में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल टाउनशिप के जरिए जापानी कंपनियों को पूर्वोत्तर और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों से जोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है.
जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी पूर्वोत्तर भारत में सड़क, स्वास्थ्य, जलापूर्ति, ऊर्जा और वन प्रबंधन जैसी परियोजनाओं में निवेश कर रही है. धुबरी-फुलबाड़ी पुल सहित सड़क संपर्क परियोजनाओं को जापानी सहायता मिल रही है. जापान का लक्ष्य बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ते हुए एक ‘इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन’ विकसित करना है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो सके.
मानव संसाधन और शिक्षा में भी सहयोग
भारत और जापान के बीच मानव संसाधन विकास भी सहयोग का प्रमुख आधार बनकर उभरा है.आईआईटी गुवाहाटी में जापानी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ अनुसंधान एवं छात्र आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जा रहा है. जापानी भाषा प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के लिए असम, मेघालय और नागालैंड में कई कार्यक्रम शुरू किए गए हैं.
सांस्कृतिक रिश्तों को भी मिल रही मजबूती
शिलांग चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल, इंफाल पीस म्यूजियम और कोहिमा पीस मेमोरियल जैसे सांस्कृतिक सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिल रही है. जापान और पूर्वोत्तर भारत के बीच खानपान, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है. भारत और जापान की बढ़ती साझेदारी यह संकेत देती है कि पूर्वोत्तर भारत अब केवल सीमावर्ती क्षेत्र नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण आर्थिक, सामरिक और संपर्क केंद्र बनकर उभर रहा है.

