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दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट को लेकर पूरी दुनिया की नजरें भारत पर हैं. रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं. इस समिट में जहां पुतिन के साथ अहम डिफेंस डील हो सकती है, वहीं 7 साल बाद आ रहे जिनपिंग के साथ व्यापार पर बड़ी चर्चा संभव है. पीएम मोदी की कूटनीति से विपक्ष खासकर पी चिदंबरम जैसे नेता परेशान हैं.
भारत में BRICS को लेकर दुनिया में चर्चा.
नई दिल्ली: इस वक्त पूरा माहौल भारत की ब्रिक्स समिट का बना हुआ है. कल से बड़े बड़े नेता दिल्ली आने लगेंगे. कल से मीटिंग्स भी शुरू हो जाएंगी. पुतिन तो आएंगे ही, जिनपिंग का आना भी आज कंफर्म हो गया. ईरान के राष्ट्रपति भी आ रहे हैं. ये सब वो देश हैं, जो ट्रंप के चुने हुए दुश्मन है. ट्रंप तो पहले से भी ब्रिक्स के लिए नाराज फूफा जैसे बने रहते हैं लेकिन इस वक्त ट्रंप की हालत और भी खराब है. वहां अमेरिका में चुनाव जीतने के लिए ट्रंप को पैसे बांटने पड़ रहे हैं. जिस ईरान को ट्रंप कहते थे कि युद्ध में हरा दिया है अब उसी ईरान को लेकर अमेरिका में ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान को हराना तो चुनाव में ट्रंप को जिताओ. यानी ट्रंप बुरी तरह से फंसे हुए हैं. उधर ट्रंप फंसे हुए हैं, और उधर इंडी वाले फंसे हुए हैं क्योंकि ये लोग पीएम मोदी की डिप्लोमेसी पर सवाल उठा रहे थे लेकिन यहां तो ब्रिक्स का अलग ही जलवा दिख रहा है. इसलिए इंडी वाले कह रहे हैं कि ब्रिक्स से क्या ही हो जाएगा.
मोदी विरोध में इन नाराज फूफाओं ने ब्रिक्स के खिलाफ कौन सा मोर्चा खोल दिया है. आज हम इसके बारे में आपको बताएंगे. पी चिदंबरम से लेकर कांग्रेस और इंडी के दूसरे नेता ब्रिक्स समिट को लेकर क्या कह रहे हैं ये आपको बताएंगे. आपको ये भी बताएंगे कि ब्रिक्स समिट में पुतिन के साथ कौन सी डील होने वाली है. जिनपिंग अपने साथ क्या गिफ्ट लेकर आ रहे हैं. नेताओं की चर्चा तो सब कर रहे हैं, ब्रिक्स समिट को देखने सुनने के लिए दूसरे कौन कौन से दिग्गज आ रहे हैं.
ब्रिक्स की पूरी तैयारी हो चुकी हैं. पीएम मोदी ने ट्रेलर दिखा कर कह भी दिया है कि all set for brics. कल से पूरा माहौल बन जाएगा. कल पुतिन भी आ जाएंगे. देर रात तक जिनपिंग भी आ जाएंगे. ईरान के राष्ट्रपति भी आ जाएंगे.
- कल से पीएम मोदी मीटिंग्स शुरू कर देंगे.
- पीएम मोदी 12 नेताओं से आमने सामने की बातचीत करेंगे.
- इनमें शुक्रवार को मोदी पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी.
- शुक्रवार को ही ईरान के राष्ट्रपति से भी द्विपक्षीय वार्ता होगी.
- शनिवार को ब्रिक्स के सेशन के बाद शी जिनपिंग से बात होगी.
पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात कल शाम 4 बजे के करीब हो सकती है… कल शाम 5 से 6 बजे के बिजनेस फोरम में पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति शामिल होंगे.
- जिनपिंग के बारे में बहुत सस्पेंस बना हुआ था कि शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट के लिए आएंगे या नहीं आएंगे. जिनपिंग के आने की बातें तो चल रही थी लेकिन लास्ट मिनट तक कुछ कंफर्म नहीं हो रहा था. आज ये बात चीन ने कंफर्म कर दी कि शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट में आएंगे.
- 7 साल बाद ऐसा होगा कि चीन के राष्ट्रपति भारत में होंगे. खासतौर पर 2020 गलवान के बाद से जिस तरह से रिश्ते बिगड़े थे उसमें पांच साल तक नेताओं के बीच कोई बातचीत ही नहीं हुई. लेकिन फिर से SCO और ब्रिक्स जैसे सम्मेलनों के जरिए बातचीत शुरू हुई.
- शी जिनपिंग का भारत आना कई मायनों में अहम है. ये चीन की तरफ से रिश्ते सुधारने की मैसेजिंग है. चीन को भी ये समझ आ गया है कि भारत से भिड़ने में कोई फायदा नहीं है.
दूसरी तरफ जिस तरह से ट्रंप ने युद्ध और टैरिफ का मोर्चा खोला हुआ है. उसका सामना करने के लिए शी जिनपिंग को भारत साथ चाहिए. दावा तो ये भी है कि शी जिनपिंग अकेले नहीं आ रहे, बहुत बड़ी टीम के साथ आ रहे हैं. वो चीन के 400 सदस्य वाले बड़े डेलिगेशन के साथ आ रहे हैं, जिसमें सीनियर डिप्लोमेट, आर्थिक रणनीतिकार और ट्रेड ऑफिशियल्स होंगे.
पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बीच द्विपक्षीय वार्ता में किन मुद्दों पर बात हो सकती है?
- इस बातचीत में रेयर अर्थ मैटेरियल की सप्लाई को लेकर बात हो सकती है.
- ये भी संभव है कि रेयर अर्थ को लेकर भारत और चीन में कोई डील हो जाए.
- कुछ क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और रॉ मैटेरियल के एक्सपोर्ट पर चीन ने रोक लगाई हुई है. इस मुद्दे पर भी चीन से बात संभव है.
- इसके अलावा दोनों देशों के बीच में जो ट्रेड Imbalance है वो भी एक बड़ा मुद्दा है.
- यानी चीन भारत को ज्यादा सामान बेचता है और कम सामान हमसे खरीदता है.
- हालांकि चीन ने पिछले कुछ वक्त में भारत से इंपोर्ट को बढ़ाया है.
- पिछले साल के मुकाबले अप्रैल से जून के बीच भारत का चीन को एक्सपोर्ट 28 प्रतिशत बढ़ा है.
- इसके अलावा ज्यादा मार्केट एक्सेस और निवेश को लेकर भी बात हो सकती है.
यानी भारत और चीन के बीच ट्रेड, निवेश पर बात हो सकती है लेकिन ये सब एकदम से नहीं होगा. क्योंकि भारत और चीन के रिश्तों में जो खटास है उसके बाद से भारत धीरे धीरे आगे बढ़ना चाहता है. इसलिए जो नॉन सेंसिटव मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर हैं, उसमें चीन की टेक्नोलॉजी और सामान के इस्तेमाल को बढ़ाया प्रोडक्शन को बढ़ाने की रणनीति पर काम हो सकता है.

