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Kailash Mansoravar Yatra: भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर सोशल मीडिया पर संदेश लिखा कि आशा है कि यह यात्रा दिलों को करीब लाए. इस पर भारतीय यूजर्स के बीच तीखी बहस छिड़ गई. जहां कुछ ने ग्लोबल साउथ के नेतृत्व और दोनों देशों में सहयोग की उम्मीद जताई, वहीं अन्य यूजर्स ने तिब्बत की संप्रभुता का मुद्दा उठाकर चीन को कड़ी नसीहत दी.
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर चीन की सॉफ्ट डिप्लोमेसी.
सदियों से भारत की आस्था का केंद्र रही पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर भू-राजनीति और सोशल मीडिया पर कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गई है. हाल ही में भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यात्रा को लेकर एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “आशा है कि यह यात्रा दिलों को करीब लाए.” इस बेहद नपे-तुले डिप्लोमैटिक बयान के आते ही भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स के बीच एक नई बहस छिड़ गई. जहां कुछ लोगों ने दोनों महाशक्तियों के बीच सहयोग और ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करने की वकालत की, वहीं कई जागरूक यूजर्स ने इतिहास, तिब्बत की संप्रभुता और सीमा विवाद के वास्तविक मुद्दों को उठाकर चीन को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
शांति और सहयोग की उम्मीद
चीनी प्रवक्ता के इस पोस्ट पर कुछ भारतीय यूजर्स ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग पर जोर दिया. पीयूष कुमार यादव नाम के एक यूजर ने लिखा, “निश्चित रूप से भारत और चीन को मिलकर करीब से काम करना चाहिए. इन दोनों देशों को ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करना चाहिए और एक नई वैश्विक व्यवस्था (New World Order) का निर्माण करना चाहिए.”
वहीं, अभिनव आलोक नामक अन्य यूजर ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण साझा करते हुए लिखा कि हमें पश्चिम की सोच यानी थ्यूसिडाइड्स ट्रैप, जहां एक उभरती शक्ति और स्थापित महाशक्ति के बीच युद्ध संभव हो जाता है, में नहीं फंसना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत, चीन और समग्र रूप से पूर्व की संस्कृति अलग है और हम सब मिलकर आगे बढ़ेंगे.
May this Yatra bring hearts closer.

