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देहरादून आज भले ही देश के प्रमुख एजुकेशन हब और पर्यटन स्थलों में गिना जाता हो, लेकिन इसकी पहचान सदियों पुराने इतिहास और आध्यात्मिक विरासत से भी जुड़ी है. द्रोणाचार्य की तपोभूमि माने जाने वाले इस शहर ने ऋषि-मुनियों की साधना से लेकर आधुनिक शिक्षा संस्थानों तक का लंबा सफर तय किया है.
देहरादून: आज देश और दुनिया में ‘एजुकेशन हब’ और एक खूबसूरत ‘टूरिस्ट नगरी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका देहरादून सिर्फ आधुनिक शिक्षा या पर्यटन तक सीमित नहीं है. भले ही आज इसे एजुकेशन हब कहा जाता है लेकिन इसका इतिहास सदियों पुराना है जहां सुरम्य वादियों के बीच शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा का भी एक बड़ा केंद्र रहा है. ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देहरादून का नाम आते ही द्रोणाचार्य की याद ताजा हो जाती है.
देहरादून को ‘द्रोणनगरी’ भी कहा जाता है
यह वही पावन भूमि है जहां गुरु द्रोणाचार्य ने निवास किया था जिसके कारण इसे ‘द्रोणनगरी’ भी कहा जाता है. केवल द्रोणाचार्य ही नहीं बल्कि भगवान दत्तात्रेय के शिष्यों और कई महान ऋषि-मुनियों ने इस धरती पर तपस्या की और आध्यात्मिक शिक्षा हासिल की. माना जाता है कि रामायण काल में रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने भी इस क्षेत्र में आत्मशुद्धि और ध्यान के लिए वक्त बिताया था.
सिख गुरु रामराय से भी जुड़ा है इसका नाम
वहीं सिख गुरु रामराय के यहां ‘डेरा’ डालने के बाद इस जगह का नाम ‘डेरादून’ और कालान्तर में ‘देहरादून’ पड़ा. समय बदला और देहरादून ने अपनी करवट बदली. कभी ऋषियों की तपोभूमि रहा यह शहर आज देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों, सैन्य अकादमी और अनुसंधान संस्थानों का गढ़ बन चुका है.आज का देहरादून भले ही एजुकेशनल हब बन गया हो लेकिन इसकी जड़ों में आज भी वही आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति रची-बसी है जो सदियों पहले ऋषि-मुनियों को यहाँ खींच लाती थी.
ब्रिटिश काल में स्थापित हुए कई बड़े संस्थान
देहरादून के स्थानीय निवासी अमरनाथ तिवारी ने कहा कि देहरादून में आज नॉर्थ ईस्ट से लेकर साउथ अफ्रीका और विदेश से स्टूडेंट पढ़ने के लिए आते हैं लेकिन यह एकदम ही एजुकेशन हब नहीं बना है क्योंकि यहां कई शैक्षणिक और शोध संस्थान समय पर स्थापित किए गए. शिक्षा की बात करें तो महाभारत काल से ही देहरादून में शिक्षा की शुरुआत हो गई थी. कौरव-पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य देहरादून आए थे और उन्होंने टपकेश्वर की गुफाओं में तपस्या की थी. इसके बाद उन्हें धनुर्विद्या का ज्ञान हासिल हुआ था. इसलिए इस शहर का पुराना नाम द्रोणनगरी था.
इसके बाद दत्तात्रेय के अनुयायियों ने भी यहां पड़ाव डाला और तपस्या की. उन्होंने कहा कि रामायण काल में भी भगवान श्री राम और लक्ष्मण ने जब रावण का वध किया था तब ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भी वह इसी भूमि पर आए थे और लक्ष्मण सिद्धमंदिर इसका साक्षी है. इसके बाद गुरु राम राय दरबार साहिब का आगमन और उसके बाद ब्रिटिश काल में यहाँ अंग्रेजों ने कई शैक्षणिक संस्थान बनाए.
एक से बढ़कर एक इंस्टीट्यूट
यहां आईएमए, फ़ॉरेस्ट रिचर्स इंस्टीट्यूट, वाइल्ड लाइफ, वाडिया इंस्टीट्यूट, ओएनजीसी, डीआरडीओ समेत कई ऐसी संस्थाएँ विकसित की गई जो अलग-अलग क्षेत्र में काम करती हैं. इसके साथ ही यहां ब्रिटिश मिशनरी ने बोर्डिंग स्कूलों को भी स्थापित किया जिनमें दून स्कूल, वेल्हम गर्ल्स, वेल्हम बॉयज, वुड स्टॉक जैसे विश्व प्रसिद्ध स्कूल हैं जहां बड़ी हस्तियों ने शिक्षा हासिल की है. उन्होंने कहा लेकिन आज देहरादून काफी बदल गया है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

