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Bob Khathing Story: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने सेना संवाद कार्यक्रम में पूर्वोत्तर के महान नायक मेजर बॉब खाथिंग के ऐतिहासिक योगदान को याद किया. जनरल चौहान ने बताया कि कैसे साल 1951 में बॉब खाथिंग ने एक साहसिक अभियान का नेतृत्व करके तवांग को पूरी तरह भारत का हिस्सा बनाया था. असम के गवर्नर बी. एल. मिश्रा और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के सहयोग से तवांग में उनके नाम पर एक शानदार म्यूजियम की स्थापना की गई है, जो नई पीढ़ी को इस जांबाज सैनिक और राजनयिक की गौरव गाथा से रूबरू करा रहा है.
तवांग के असली हीरो मेजर बॉब खाथिंग की यादें होंगी ताजा, सीडीएस चौहान ने अरुणाचल में शुरू कराया म्यूजियम.
नई दिल्ली: सेना संवाद कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने देश के एक ऐसे महान नायक की गौरव गाथा को याद किया है, जिसका नाम इतिहास के पन्नों में कहीं खो गया था. जनरल अनिल चौहान ने पूर्वोत्तर भारत के महान सपूत मेजर बॉब खाथिंग के साहसिक कारनामों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके काम देश के लिए बहुत बड़े गौरव की बात हैं. मेजर बॉब खाथिंग नागालैंड के रहने वाले थे और उन्होंने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के साथ-साथ मणिपुर के महाराजा की सेना में भी अपनी सेवाएं दी थीं. जनरल चौहान ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक सैनिक, राजनयिक और राजदूत के रूप में एक अद्भुत इंसान थे. वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनमें ये सभी खूबियां एक साथ समाहित थीं. भारत के इतिहास में उनका सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने साल 1951 में भारत को तवांग जैसा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा दिलाया था.
जनरल चौहान ने बताया कि साल 1951 में मेजर बॉब खाथिंग ने असम राइफल्स के जवानों के साथ एक बहुत बड़े और बेहद कठिन अभियान का नेतृत्व किया था. वे पैदल ही दुर्गम पहाड़ियों को पार करते हुए तवांग पहुंचे थे और वहां पर भारत का तिरंगा झंडा फहराकर उस पूरे क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर भारत का हिस्सा बना दिया था. यह एक ऐसा ऐतिहासिक कदम था, जिसने भारत की उत्तरी सीमा को हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया था. चीन की आक्रामक नीतियों के बीच तवांग को भारत के नक्शे में शामिल करना एक बहुत बड़ा और साहसिक फैसला था, जिसे मेजर खाथिंग ने अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस से पूरा करके दिखाया था. जनरल चौहान ने कहा कि ऐसे महान नायकों की यादों को दोबारा जीवित करना उन्हें हमेशा से बहुत ज्यादा खुशी देता है.
तवांग में कैसे शुरू हुआ मेजर खाथिंग के नाम का म्यूजियम?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने कार्यक्रम में एक बेहद दिलचस्प वाकया साझा किया है कि कैसे उन्होंने मेजर बॉब खाथिंग की यादों को सहेजने का बीड़ा उठाया है. उन्होंने बताया कि जब वे सेना के सक्रिय सेवाकाल में थे और बाद में भी, उनके मन में हमेशा यह इच्छा रहती थी कि देश के इस महान नायक को वह सम्मान मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं. इसके लिए उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में मेजर बॉब खाथिंग के नाम पर एक म्यूजियम बनाने की योजना पर काम शुरू किया था. इस पूरे प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने के लिए उन्हें असम के तत्कालीन गवर्नर बी. एल. मिश्रा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू का भरपूर सहयोग मिला है. इन सभी के संयुक्त प्रयासों से तवांग में एक शानदार म्यूजियम की स्थापना की गई है, जो अब पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है.
जनरल चौहान ने कहा कि जब आप अपने मुख्य कर्तव्यों और चार्टर से परे जाकर कुछ ऐसा काम करते हैं जो देश के इतिहास और संस्कृति को संवारने का काम करे, तो वह काम आपको एक अलग ही संतुष्टि देता है. जीवन में कई बार इंसान ऐसे कई प्रयास करने की कोशिश करता है, जिनमें से कुछ प्रयास सफल हो जाते हैं. तवांग में मेजर खाथिंग का म्यूजियम बनना एक ऐसा ही सफल प्रयास है, जो आज के युवाओं को देश की रक्षा और सेवा करने की प्रेरणा दे रहा है. इस म्यूजियम के जरिए लोग अब यह जान पा रहे हैं कि अरुणाचल प्रदेश का तवांग क्षेत्र भारत का हिस्सा कैसे बना और इसके पीछे किस जांबाज सैनिक की मुख्य भूमिका थी.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें
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