जोधपुर, राजस्थान: 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चले तरंग शक्ति 2026 में सात देशों की वायुसेनाओं की भागीदारी भारत के लिए कई मायनों में अहम रही. यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ, जब आधुनिक युद्ध में हवाई ताकत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और देश अपनी सैन्य जरूरतों के लिए स्वदेशी तकनीक पर भी जोर दे रहा है. भारतीय वायुसेना ने इस अभ्यास के जरिए अपनी क्षमताओं को सामने रखा, वहीं तेजस और प्रचंड जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म ने भारत के रक्षा उद्योग की प्रगति को भी दिखाया.
इस अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका की वायुसेनाओं ने हिस्सा लिया. 32 देशों के प्रतिनिधि पर्यवेक्षक के तौर पर भी मौजूद रहे. ‘पावर इन पार्टनरशिप’ यानी साझेदारी में ताकत, इस अभ्यास का विषय था. लेकिन भारत के लिए इसका महत्व केवल दूसरे देशों के साथ अभ्यास करने तक सीमित नहीं है. ऐसे मौके अपनी क्षमताएं दिखाने, दूसरे देशों के अनुभव से सीखने और सैन्य संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी देते हैं.
EX: Tarang Shakti 2026 | Source: Indian Airforce / Mig 29 / Jaguar / SU30 / Tejas / Mirage 2000 / Rafale
हवाई युद्ध में सिर्फ लड़ाकू विमान काफी नहीं
हवाई ताकत की बात आते ही आमतौर पर लड़ाकू विमानों का जिक्र होता है, लेकिन किसी सैन्य अभियान में कई दूसरी क्षमताएं भी उतनी ही जरूरी होती हैं. परिवहन विमान सैनिकों और जरूरी सामान को पहुंचाते हैं, निगरानी प्रणालियां हालात पर नजर रखने में मदद करती हैं और हवा में ईंधन भरने की सुविधा विमानों को लंबे समय तक अभियान में बने रहने का मौका देती है. इनके साथ मिशन की योजना बनाने वाले अधिकारियों और तकनीकी टीमों का काम भी अहम होता है.
तरंग शक्ति 2026 में लड़ाकू विमानों के साथ परिवहन, निगरानी और हवा में ईंधन भरने से जुड़ी क्षमताओं को भी शामिल किया गया. अलग-अलग देशों के पायलटों और सैन्य कर्मियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने का मौका मिला. ऐसे अभ्यासों से यह जानने में मदद मिलती है कि अलग-अलग प्रणालियों और प्रक्रियाओं के साथ काम करते समय कहां बेहतर तालमेल की जरूरत है.
भारत के लिए यह अनुभव इसलिए भी उपयोगी है, क्योंकि उसे अपनी वायुसेना को लगातार बदलती सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से तैयार रखना है. इसके लिए आधुनिक विमान और हथियार जरूरी हैं, लेकिन उनका सही इस्तेमाल, बेहतर योजना और अलग-अलग सैन्य इकाइयों के बीच तालमेल भी उतना ही मायने रखता है.
EX: Tarang Shakti 2026 | Source: Indian Airforce / F35 / Tejas
ऑपरेशन सिंदूर के बाद हवाई ताकत पर चर्चा क्यों अहम है?
ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर दिखाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में वायुसेना की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है. किसी भी सैन्य अभियान में लक्ष्य के मुताबिक कार्रवाई करना, समय पर फैसले लेना और उपलब्ध क्षमताओं का सही इस्तेमाल करना जरूरी होता है. इसके लिए तैयारी और योजना दोनों की अहम भूमिका होती है.
तरंग शक्ति को ऑपरेशन सिंदूर के साथ जोड़कर देखने का एक पहलू यह भी है कि सैन्य तैयारी लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. वास्तविक अभियान और बहुराष्ट्रीय अभ्यास एक जैसे नहीं होते, लेकिन अभ्यास से मिलने वाला अनुभव सैन्य कर्मियों को दूसरे देशों की कार्यप्रणाली समझने और अपनी तैयारी बेहतर करने में मदद कर सकता है.
आज हवाई अभियान केवल लड़ाकू विमानों की उड़ान तक सीमित नहीं हैं. निगरानी, संचार, ईंधन की उपलब्धता और मिशन की योजना जैसे कई पहलू एक साथ काम करते हैं. इसलिए वायुसेना की ताकत का आकलन करते समय उसके विमानों के साथ इन क्षमताओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
EX: Tarang Shakti 2026 | Source: Indian Airforce / MIG 29 / Jaguar
तेजस और प्रचंड से भारत क्या संदेश देना चाहता है?
तरंग शक्ति 2026 में स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान LCA तेजस और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर LCH प्रचंड की भागीदारी खास रही. भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में अपनी तकनीक और निर्माण क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय अभ्यास के दौरान स्वदेशी प्लेटफॉर्म की मौजूदगी भारत को अपनी प्रगति दिखाने का अवसर देती है.
तेजस और प्रचंड केवल सैन्य प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि देश में विमान डिजाइन करने, इंजीनियरिंग और निर्माण की क्षमता विकसित करने के प्रयासों के उदाहरण भी हैं. इनके जरिए भारत यह दिखा सकता है कि वह अपनी सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर भी काम कर रहा है.
हालांकि, किसी अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में हिस्सा लेने भर से किसी विमान की हर परिचालन क्षमता या दूसरे देशों की प्रणालियों के साथ उसकी पूरी अनुकूलता साबित नहीं हो जाती. इसके लिए अलग-अलग परीक्षणों और परिचालन अनुभव की जरूरत होती है. फिर भी, ऐसे मंच स्वदेशी तकनीक को प्रदर्शित करने और भारतीय रक्षा उद्योग की पहचान बढ़ाने में मदद करते हैं.
आत्मनिर्भरता का काम केवल नया विमान या हेलीकॉप्टर बनाने से पूरा नहीं होता. उसके रखरखाव, कलपुर्जों की उपलब्धता, तकनीकी सुधार और जरूरत के मुताबिक उत्पादन बढ़ाने की क्षमता भी जरूरी है. भारत को इन सभी क्षेत्रों में लगातार काम करना होगा, तभी स्वदेशी रक्षा तकनीक पर भरोसा और निर्भरता दोनों बढ़ेंगे.
EX: Tarang Shakti 2026 | Source: Indian Airforce / Mirage 2000 / Rafale
सात देशों की भागीदारी भारत के लिए क्यों मायने रखती है?
तरंग शक्ति में अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के साथ ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश और श्रीलंका की भागीदारी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का अभ्यास बनाया. इसके अलावा 32 देशों के प्रतिनिधियों ने पर्यवेक्षक के तौर पर हिस्सा लिया.
भारत के लिए अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के साथ काम करने का अवसर अपने आप में उपयोगी है. इससे सैन्य अधिकारियों को दूसरे देशों के अनुभवों और कार्यप्रणाली को समझने का मौका मिलता है. साथ ही, भारत अपनी क्षमताओं और रक्षा क्षेत्र में हो रहे विकास को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने रख सकता है.
यहां एक बात समझना जरूरी है. किसी देश का सैन्य अभ्यास में शामिल होना यह नहीं बताता कि उसकी सभी रणनीतिक प्राथमिकताएं भारत के साथ एक जैसी हैं. हर देश अपने हितों और सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से फैसले लेता है. इसके बावजूद, ऐसे अभ्यास आपसी संपर्क बढ़ाने और रक्षा सहयोग के रास्ते खुले रखने में मदद करते हैं.
भारत के लिए यह संतुलन जरूरी है. उसे अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करने के साथ अलग-अलग देशों के साथ व्यावहारिक संबंध भी बनाए रखने हैं. तरंग शक्ति जैसे अभ्यास इसी दिशा में एक अवसर देते हैं.
EX: Tarang Shakti 2026 | Source: Indian Airforce
रक्षा सहयोग के साथ भारतीय संस्कृति की झलक
तरंग शक्ति में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए केवल हवाई अभ्यास ही नहीं, बल्कि दूसरे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. उन्हें भारत के रक्षा निर्माण और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े औद्योगिक दौरों पर ले जाया गया. पेशेवर बातचीत के अलावा योग सत्र, ऐतिहासिक स्थलों के दौरे और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित हुईं.
इंटरनेशनल नाइट में भाग लेने वाले देशों की संस्कृति और परंपराओं को सामने रखा गया. इन कार्यक्रमों का महत्व इस बात में है कि सैन्य कर्मियों को औपचारिक बैठकों और अभ्यास के अलावा भी एक-दूसरे को जानने का अवसर मिलता है. औद्योगिक दौरों से विदेशी प्रतिनिधियों को भारत के रक्षा उद्योग की जानकारी मिली, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आपसी मेलजोल बढ़ाने का मौका दिया.
EX: Tarang Shakti 2026 | Source: Indian Airforce / Tejas
ओपन डे पर 20 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे
तरंग शक्ति के दौरान आयोजित ओपन डे में 20,000 से ज्यादा लोग पहुंचे. आम लोगों को भारतीय वायुसेना के विमानों और उसकी क्षमताओं को करीब से देखने का मौका मिला. ऐसे कार्यक्रम वायुसेना और नागरिकों के बीच जुड़ाव बढ़ाते हैं. खासकर युवाओं के लिए यह विमानन और सैन्य सेवा के बारे में जानने का अवसर होता है.
रक्षा से जुड़े विषयों में आम लोगों की दिलचस्पी बढ़ाना भी जरूरी है. जब लोग वायुसेना के काम और उसकी चुनौतियों को करीब से देखते हैं, तो उन्हें देश की सुरक्षा में सशस्त्र बलों की भूमिका समझने का अवसर मिलता है.
94 साल की वायुसेना के सामने आगे की चुनौतियां
भारतीय वायुसेना अपनी 94वीं वर्षगांठ मना रही है. नौ दशक से अधिक के सफर में वायुसेना की क्षमताओं और काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है. अब उसके सामने आधुनिक तकनीक को अपनाने, विमानों और दूसरी प्रणालियों का बेहतर इस्तेमाल करने तथा स्वदेशी रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाने की जरूरत है.
आने वाले समय में चुनौती केवल नए विमान शामिल करने की नहीं होगी. उनकी उपलब्धता, रखरखाव, तकनीकी सहायता और बदलती जरूरतों के मुताबिक उन्हें इस्तेमाल करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी. आधुनिक वायुसेना के लिए इन सभी पहलुओं पर एक साथ ध्यान देना जरूरी है.
तरंग शक्ति 2026 को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. सात देशों की भागीदारी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग का अवसर दिया, जबकि तेजस और प्रचंड की मौजूदगी ने स्वदेशी रक्षा तकनीक को सामने रखा. अभ्यास के दौरान औद्योगिक दौरों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इसका दायरा भी बढ़ाया.
भारत के लिए आगे का रास्ता साफ है: अपनी वायुसेना को मजबूत करना, स्वदेशी रक्षा तकनीक को लगातार बेहतर बनाना और दूसरे देशों के साथ ऐसे संबंध बनाए रखना, जो जरूरत के समय काम आ सकें. अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और आत्मनिर्भरता एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं. भारत को अपनी सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से दोनों पर साथ-साथ काम करना होगा.

