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घनेरी एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार इसके फल, पत्ते और छाल में कई औषधीय गुण मौजूद हैं, जो बवासीर, बुखार, गठिया और पेट संबंधी समस्याओं में लाभकारी माने जाते हैं. हालांकि इसका सेवन हमेशा आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और निगरानी में ही करना चाहिए.
भारत देश में कई ऐसे पौधे देखने को मिलते हैं, जो अपने औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं. इन्हीं में से एक है घनेरी का पौधा, जो अक्सर सड़क किनारे दिख जाता हैं. इसको गांव में जंगली पौधा कहा जाता हैं. घनेरी एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा है. यह आयुर्वेदिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इस पौधे में कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो कई गंभीर बीमारियों में मददगार हैं.
घनेरी का उपयोग प्राचीन काल से ही विभिन्न बीमारियों के इलाज में किया जाता आ रहा है. यह एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है. इसके नियमित सेवन से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है.
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, घनेरी एक औषधीय पौधा है, इसके फल, पत्ते और छाल हमारी सेहत व स्वास्थ्य के लिए काफी बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसमें बहुत सारे औषधीय गुण मौजूद होते हैं.
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घनेरी के पौधें में मैग्नीशियम, सल्फ़र, बोरॉन, क्लोरीन, लोहा, ज़िंक, नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस, और पोटैशियम जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें कई बीमारियों से बचाते हैं. बवासीर में फायदेमंद घनेरी की छाल, आँवला का फल तथा लाल कचनार बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें.
इस काढ़ा से बने खड्यूष में अनार, इमली आदि फलों के रस को मिलाकर सेवन करने से खूनी बबासीर में आराम मिलता है. खूनी दस्त व पेचिश की समस्या में फायदेमंद घनेरी के ताजे फलों को कूटकर उसका रस निकाल लें. दिन में 3-4 बार इस रस का 1-1 चम्मच सेवन करें. कुछ दिन तक लगातार पीने से तो खूनी दस्त रुक सकते हैं.
इसमें बुखार और दर्द आदि दूर करने के गुण होते हैं. इसकी पत्तियों को पीसकर सिर पर लेप करने से बुखार के कारण होने वाला सिरदर्द तो दूर होता ही है, साथ ही जलन और सिर का भारीपन से भी छुटकारा मिलता है. बुखार में फायदेमंद घनेरी के 20 से 40 मिली काढ़ा में चीनी या मिश्री मिलाकर इसे ठंडा कर लें. और
इसका सुबह और शाम सेवन करने से जलन और तेज प्यास वाली गंभीर बुखार में लाभ होता है. इसके अलावा घनेरी के फल का एक चम्मच रस दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से भी बुखार ठीक हो जाता है. गठिया में फायदेमंद मुलेठी और गंभारी के फल को मिलाकर काढ़ा बनाया जा सकता हैं.
इस काढ़ा का दिन में तीन बार 20 से 40 मिली मात्रा में सेवन करने से आमवात या गठिया में लाभ होता है. गंभारी की जड़ का 40 मिली काढ़ा बना लें. इसे सुबह शाम सेवन करने से यह पेट की बीमारी में फायदा पहुंचाता है. ये दोनों ही गैस बनने या पेट में कीड़े होने आदि की स्थिति में भी लाभ देते हैं. लेकिन कभी भी इसका सेवन सावधानी और डॉक्टर की देखरेख में ही करें. वरना यह जहरीला भी हो सकता हैं.

