रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन पिछले कई दिनों से दिल्ली में हैं. दोनों रांची लौटने वाले हैं, लेकिन दोनों की इस दिल्ली यात्रा ने राज्य की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है. सूत्र बताते हैं कि हेमंत ने दिल्ली में एक वरिष्ठ बीजेपी नेता से गुप्त मुलाकात की जिससे एनडीए (NDA) के साथ गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गईं. बिहार चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद यह खबरें और जोर पकड़ रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जेएमएम (JMM) बीजेपी के साथ मिलकर नया समीकरण बना रही है. लेकिन राजनीतिक के गलियारों में सवाल गूंज रहा है कि- क्या यह सिर्फ अफवाह है या सत्ता फेरबदल का कोई नया खेल?
सूत्रों की खबर- झारखंड में नया गठबंधन?
संख्याबल का खेल: वर्तमान vs संभावित समीकरण
झारखंड की 81 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 41 चाहिए. फिलहाल महागठबंधन मजबूत दिख रहा है. वर्तमान स्थिति में विधानसभा की तस्वीर इस प्रकार है- JMM के 34, कांग्रेस के 16, RJD के 4 और लेफ्ट के 2 विधायक मिलाकर कुल 56 हो जाते हैं. बता दें कि नवंबर 2024 के चुनाव में JMM ने शानदार वापसी की थी, लेकिन अब NDA की नजरें गड़ाई हैं. हालांकि, समानांतर रूप से अफवाहें भी हवा में तैर रही हैं. इसके मुताबिक, अगर JMM, NDA में चली गई तो नया समीकरण ऐसा बनेगा- JMM 34, BJP 21, LJP(RV) 1, AJSU 1 और JDU की 1 सीट मिलाकर कुल 58 हो जाते हैं. ऐसे में महागठबंधन की सरकार गिर जाएगी.
| झारखंड में महागठबंधन का वर्तमान स्वरूप | बदलाव हुआ तो यह होगा सत्ता समीकरण |
| JMM- 34 CONG- 16 RJD- 04 Left- 02 |
JMM- 34 BJP- 21 LJPR- 01 AJSU- 01 JDU- 01 |
| TOTAL-56 | TOTAL- 58 |
महागठबंधन की सफाई: सबकुछ ठीक है!
झारखंड में सत्ता फेरबदल की इन अटकलों के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने मोर्चा संभाला और साफ कहा कि गठबंधन में किसी तरह का संकट नहीं है. उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री सिर्फ केंद्र से अनुदान और सरकारी योजनाओं को फॉलो-अप के लिए दिल्ली में हैं न कि किसी राजनीतिक सौदेबाजी के लिए. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि-हमारे सभी विधायक एकजुट हैं और महागठबंधन मजबूत है. सरकार पांच साल पूरे करेगी, अफवाहों के सहारे राजनीति नहीं चलती. कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि 4 दिसंबर को गठबंधन विधायकों की बैठक बुलाई गई है, ताकि माहौल को साफ किया जा सके और किसी भी तरह की भ्रम की गुंजाइश न रहे.
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने क्या कहा?
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी अपरोक्ष रूप से इस घटना क्रम को लेकर टिप्पणी की है. पार्टी के नेता कुणाल सारंगी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, भाजपा घाटशिला का उप चुनाव हारते ही सरेंडर मोड पर है. इनके नेतागण जान चुके है कि अगले 20 साल भाजपा झारखंड के सत्ता के केंद्र में नहीं लौटेगी, इसलिए हर रोज एक नया शिगूफा – हर रोज एक नया सपना! पर सब ये जान लें झारखंड ना झुका था – ना झुकेगा.
झारखंड की सियासत-स्थिरता या तूफान?
बहरहाल, कयासबाजियों और अटकलों का दौर जारी है. कई लोग इसे अफवाह भी कह रहे हैं, लेकिन इतना तो साफ है कि अगर इस दिशा में राजनीतिक कदम बढ़े तो सरकार गिराने या बनाने के लिए आंकड़े समस्या नहीं बनेंगे. हालांकि, फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है, लेकिन घटनाक्रमों ने स्थिति को बेहद दिलचस्प बना दिया है. महागठबंधन के दावों के बावजूद, राजनीतिक हलचल यह संकेत जरूर देती है कि आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक हो सकते हैं. फिलहाल झारखंड इंतजार में है- क्या मौजूदा सरकार अपनी पूर्ण अवधि पर कायम रहेगी या फिर राज्य एक बार फिर सत्ता परिवर्तन का गवाह बनेगा?

