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देश के अलग-अलग हिस्सों से जिम और फिटनेस क्लबों में महिलाओं, बालिकाओं और किशोरियों के साथ यौन शोषण के गंभीर मामले सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने इन घटनाओं को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण से भी जवाब मांगा गया है. NHRC ने जिम और फिटनेस सेंटर खोलने और चलाने से जुड़े मौजूदा नियमों, लाइसेंस व्यवस्था और निगरानी विभाग से विस्तार में जानकारी मांगी है. आयोग का कहना है कि यदि इनकी पर्याप्त नियम और निगरानी नहीं होगी, तो कमजोर वर्ग, खासकर लड़कियां, असुरक्षित बनी रहेंगी. (सभी फोटोज एआई से बनाया गया हैं.)
देश के अलग-अलग राज्यों से जिम और फिटनेस क्लबों में महिलाओं, बालिकाओं और किशोरियों के साथ यौन शोषण की गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है. इन मामलों को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है. साथ ही खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण से भी विस्तार से जानकारी मांगी गई है.
NHRC के संज्ञान में आई रिपोर्टों के मुताबिक कई जिम और फिटनेस सेंटरों में कुछ ट्रेनर अपनी पावर और भरोसे का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. कई जगहों पर महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के साथ अनुचित व्यवहार और यौन शोषण के आरोप लगे हैं. खास बात यह है कि इनमें से कई मामलों में पीड़ित डर, शर्म और सामाजिक दबाव के चलते शिकायत भी दर्ज नहीं करा पातीं.
आयोग का मानना है कि जिम और फिटनेस उद्योग में स्पष्ट और सख्त नियमों की कमी इस समस्या को और गंभीर बना रही है. कई राज्यों में जिम खोलने और चलाने के लिए कोई समान मानक तय नहीं हैं. बिना किसी पृष्ठभूमि जांच के ट्रेनरों को काम पर रखा जा रहा है. इससे अपराधी मानसिकता वाले लोगों को महिलाओं और बच्चों के करीब पहुंचने का मौका मिल जाता है.
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NHRC ने यह भी चिंता जताई है कि कई जिमों में बिना मानक के फूड सप्लीमेंट बेचे जा रहे हैं. इसके अलावा गलत तरीके से करवाई जा रही एक्सरसाइज़ लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है. युवा वर्ग, खासकर किशोर, बिना सही जानकारी के इन सप्लीमेंट्स का सेवन कर रहे हैं, जिससे हार्मोनल और शारीरिक समस्याएं बढ़ रही हैं.
आयोग ने सभी राज्यों के चीफ सेक्रेटरी से पूछा है कि उनके यहां जिम और फिटनेस सेंटर खोलने के लिए क्या नियम हैं. ट्रेनरों की योग्यता, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और लाइसेंस प्रक्रिया क्या है, इसकी भी जानकारी मांगी गई है. इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई का क्या तंत्र मौजूद है.
NHRC ने खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को भी नोटिस भेजा है. उनसे यह जानना चाहा गया है कि फिटनेस और ट्रेनिंग से जुड़े संस्थानों की निगरानी के लिए कौन-से दिशा-निर्देश लागू हैं. आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि खेल और फिटनेस के नाम पर किसी तरह का शोषण न हो.
आयोग ने साफ कहा है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है. जिम जैसे स्थान, जहां लोग भरोसे के साथ अपनी सेहत सुधारने जाते हैं, वहां डर और असुरक्षा का माहौल नहीं होना चाहिए. NHRC ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत कदम उठाएं और ऐसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाएं.
सूत्रों के मुताबिक NHRC की ओर से मिली जानकारी के आधार पर देशभर के लिए एक समान गाइडलाइन तैयार की जा सकती है. इसमें ट्रेनरों की अनिवार्य ट्रेनिंग, महिला ट्रेनरों की नियुक्ति, CCTV, शिकायत हेल्पलाइन और नियमित निरीक्षण जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं. आयोग का कहना है कि फिटनेस के नाम पर शोषण की इजाजत किसी भी कीमत पर नहीं दी जाएगी.
NHRC ने यह भी चिंता जताई है कि कई जिमों में बिना किसी मानक के ट्रेनर काम कर रहे हैं और गलत तरीकों से एक्सरसाइज करवाई जा रही है, जिससे लोगों की सेहत को भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है. इसके अलावा, अवैध और बिना प्रमाणित फूड सप्लीमेंट का इस्तेमाल भी आम हो गया है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है. आयोग ने राज्य सरकारों से पूछा है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है.

