पाकिस्तान की हालत अब ऐसी हो गई है कि कोई बात नहीं करना चाहता. विदेश मंत्री एस. जयशंकर से जब पाकिस्तान को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ कह दिया…वेस्ट ऑफ टाइम… उस पर कीमती समय बर्बाद करने की कोई जरूरत नहीं है. जयशंकर ने 2008 के मुंबई आतंकी हमले को भारत-पाकिस्तान रिश्तों में एक ‘टर्निंग पॉइंट’ बताया. उन्होंने कहा, इस हमले के बाद भारत के लोग एकजुट हो गए और महसूस किया कि अब पाकिस्तान को और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
जयशंकर ने कहा, 26/11 का मुंबई हमला वह पल था, जब राजनीतिक दलों से लेकर भारत के लोगों ने कहा, बहुत हो गया. हम अब पड़ोसी के इस व्यवहार को स्वीकार नहीं कर सकते. जयशंकर ने तब की यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, समाज में यह भावना बहुत मजबूत थी, लेकिन शायद उस समय की सरकार इसे पूरी तरह समझ नहीं पाई. 2014 में सरकार बदलने के बाद पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया गया कि आतंकवाद के लिए परिणाम भुगतने होंगे.
पाकिस्तान की पुरानी आदतें बरकरार
जयशंकर ने भारत और पाकिस्तान की तुलना करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक और राजनीतिक प्रगति की है. भारत की वैश्विक साख बढ़ी है और आज हमारा ब्रांड टेक्नोलॉजी है. दूसरी ओर, पाकिस्तान अपनी पुरानी आदतों में फंसा हुआ है. उन्होंने कहा, पाकिस्तान बदलने की बजाय वही पुराना खेल खेल रहा है. आतंकवाद का ब्रांड अब उनसे चिपक गया है.
पाकिस्तान खेल रहा डबल गेम
विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की नीतियों पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि जब अमेरिका और नाटो अफगानिस्तान में थे, तब पाकिस्तान तालिबान और दूसरी तरफ दोनों के साथ “दोहरा खेल” खेल रहा था. लेकिन जब अमेरिकी सेना चली गई, तो यह खेल खत्म हो गया. जयशंकर ने कहा, पाकिस्तान ने जिस आतंकवाद को बढ़ावा दिया, वही अब उनके लिए मुसीबत बन गया है. जो फायदा वे इस दोहरे खेल से ले रहे थे, वह भी खत्म हो गया.
‘पाकिस्तान पर क्यों समय बर्बाद करें?
जब एक छात्र ने पूछा कि भारत सरकार अब पाकिस्तान पर सार्वजनिक रूप से कम क्यों बोलती है, तो जयशंकर ने जवाब दिया, “जब भारत इतना आगे बढ़ चुका है, तो पाकिस्तान जैसे देश पर समय बर्बाद करने की क्या जरूरत? अगर आतंकवाद होगा, तो हम जवाब देंगे. लेकिन हमें उन पर हर समय ध्यान देने की जरूरत नहीं. 2020 के गलवान घाटी में भारत-चीन तनाव पर जयशंकर ने कहा कि पीएम मोदी का रुख स्पष्ट था. उन्होंने पहली बैठक में ही कहा था कि हम जवाब देंगे. पीएम मोदी के मन में कोई संदेह नहीं था. फैसला लिया गया और सिस्टम ने उसे लागू करने का रास्ता निकाला.
भारत का भविष्य क्या होगा
जयशंकर ने अगले दशक को टेक्नोलॉजी का युग बताया. विदेश मंत्री ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्पेस रिसर्च, ड्रोन, और नैनोटेक्नोलॉजी का समय है. भारत इसमें आत्मनिर्भर बनने की ओर है. हम इतना बड़ा देश हैं, हमें किसी का पिछलग्गू बनने की जरूरत नहीं. कई देश कहते हैं कि अगर कुछ चाहिए, तो हमारे साथ आओ. लेकिन भारत किसी के साए में नहीं रहेगा. जयशंकर के इस बयान की सोशल मीडिया में जमकर तारीफ हो रही है. एक यूजर ने लिखा, जयशंकर ने साफ कर दिया कि पाकिस्तान अब भारत के लिए प्राथमिकता नहीं. यह भारत की नई ताकत दिखाता है.

