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Births and Deaths (Amendment) Bill: जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है. नए नियम के तहत अगर किसी जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन दो साल से ज्यादा देर से कराया जाता है तो प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा. सरकार का कहना है कि इससे फर्जी प्रमाणपत्र और गलत रजिस्ट्रेशन पर रोक लगेगी. वहीं एक साल से दो साल तक की देरी वाले मामलों में प्रशासनिक मंजूरी की व्यवस्था जारी रहेगी.
जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा से पास हो गया है.
नई दिल्ली: जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने वालों के लिए बड़ी खबर है. अब अगर किसी व्यक्ति को जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराने में दो साल से ज्यादा की देरी होती है तो प्रक्रिया पहले जैसी आसान नहीं रहेगी. सरकार ने नियमों को सख्त करने की तैयारी कर ली है. लोकसभा ने शुक्रवार को ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी. इस बिल के बाद लंबे समय से लंबित रजिस्ट्रेशन मामलों में जांच और मंजूरी की प्रक्रिया बढ़ जाएगी. खासकर दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में अब सीधे प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होगी. सरकार का कहना है कि इस बदलाव से फर्जी दस्तावेजों और गलत रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
दरअसल, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र आज सिर्फ एक दस्तावेज नहीं रह गए हैं. स्कूल एडमिशन से लेकर पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं, संपत्ति विवाद और कानूनी प्रक्रियाओं तक इनकी जरूरत पड़ती है. ऐसे में गलत या फर्जी प्रमाणपत्र बड़ी समस्या बन सकते हैं. सरकार इसी को ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को ज्यादा मजबूत बनाना चाहती है. नए संशोधन में देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग स्तर पर मंजूरी का प्रावधान रखा गया है. हालांकि बिल लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच बिना चर्चा के पास हुआ, जिसको लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली.
जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन में क्या बदलेगा नया नियम?
- अभी के नियमों के मुताबिक अगर जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन एक साल से ज्यादा समय बाद कराया जाता है तो जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेनी पड़ती है. नए संशोधन के बाद एक साल से दो साल तक की देरी वाले मामलों में यही व्यवस्था जारी रहेगी. लेकिन दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) की अनुमति लेना अनिवार्य होगा.
- सरकार का मानना है कि समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं होने से कई तरह की गड़बड़ियों की संभावना बनी रहती है. कई बार लोग पुराने रिकॉर्ड में बदलाव कराने या नए दस्तावेज तैयार कराने की कोशिश करते हैं. ऐसे मामलों में न्यायिक जांच की जरूरत महसूस की गई है. नए नियम का मकसद यही है कि कोई भी व्यक्ति गलत जानकारी के आधार पर जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल न कर सके.
दो साल से ज्यादा देरी वाले मामलों में कोर्ट जैसी निगरानी
नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी जन्म या मृत्यु की घटना का रजिस्ट्रेशन दो साल से ज्यादा समय बाद कराता है तो उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के सामने आवेदन करना होगा. मजिस्ट्रेट मामले की जांच के बाद ही रजिस्ट्रेशन की अनुमति देंगे. सरकार का कहना है कि यह कदम आम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है. खासकर उन मामलों में जहां पुराने रिकॉर्ड नहीं हैं या दस्तावेजों में अंतर पाया जाता है, वहां न्यायिक मंजूरी से प्रक्रिया ज्यादा विश्वसनीय बनेगी.
लोकसभा में हंगामे के बीच पास हुआ बिल
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच पारित हुआ. विपक्ष जुलाई 20 की छात्र हिंसा और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग कर रहा था. हंगामे के बीच बिल पर चर्चा नहीं हो सकी और इसे ध्वनि मत से मंजूरी दे दी गई. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया. जनता ने आपको संसद में भेजा है और उन्हें आपसे जवाब चाहिए.’ वहीं पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने भी कहा कि सहयोग नहीं मिलने के कारण बिल बिना चर्चा के पास करना पड़ा.
सरकार ने क्यों जरूरी बताया संशोधन?
सरकार के अनुसार जन्म और मृत्यु का सही रिकॉर्ड किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होता है. जनगणना, स्वास्थ्य योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सरकारी नीतियों के लिए सही आंकड़े जरूरी हैं. अगर जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर दर्ज नहीं होता है तो सरकारी डेटा प्रभावित होता है. इसके अलावा गलत प्रमाणपत्रों के जरिए धोखाधड़ी की संभावना भी बढ़ जाती है. इसी वजह से लंबे समय से लंबित मामलों के लिए ज्यादा सख्त व्यवस्था बनाई गई है.
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
नए नियम का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो कई साल बाद जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिश करेंगे. ऐसे लोगों को अब ज्यादा दस्तावेज जुटाने पड़ सकते हैं और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है. हालांकि, समय पर रजिस्ट्रेशन कराने वालों के लिए प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. सरकार लगातार लोगों से अपील करती रही है कि जन्म और मृत्यु की घटनाओं का पंजीकरण तय समय सीमा के अंदर कराया जाए.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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