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Gonda News: छुईमुई का वैज्ञानिक नाम मिमोसा पुडिका है. यह जमीन पर फैलने वाला छोटा पौधा है. इसकी पत्तियां छूने या हिलने पर कुछ समय के लिए सिकुड़ जाती हैं. थोड़ी देर बाद पत्तियां फिर से सामान्य अवस्था में आ जाती हैं. इस पौधे में छोटे-छोटे फूल भी लगते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह पौधा अक्सर खेतों, बगीचों और खाली जमीन पर देखने को मिल जाता है. हालांकि, छुईमुई केवल अपनी खासियत के लिए ही नहीं, बल्कि पारंपरिक औषधीय प्रयोगों के लिए भी जानी जाती है.
गोंडा: प्रकृति में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में लंबे समय से किया जाता रहा है. छुईमुई भी ऐसा ही एक पौधा है. इसे लाजवंती के नाम से भी जाना जाता है. इस पौधे की सबसे खास बात यह है कि इसे छूते ही इसकी पत्तियां सिकुड़कर बंद हो जाती हैं. अपनी इस अनोखी खासियत के कारण यह बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है. हालांकि, छुईमुई केवल अपनी खासियत के लिए ही नहीं, बल्कि पारंपरिक औषधीय प्रयोगों के लिए भी जानी जाती है.
छुईमुई के पौधे की क्या है खासियत?
छुईमुई का वैज्ञानिक नाम मिमोसा पुडिका है. यह जमीन पर फैलने वाला छोटा पौधा है. इसकी पत्तियां छूने या हिलने पर कुछ समय के लिए सिकुड़ जाती हैं. थोड़ी देर बाद पत्तियां फिर से सामान्य अवस्था में आ जाती हैं. इस पौधे में छोटे-छोटे फूल भी लगते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह पौधा अक्सर खेतों, बगीचों और खाली जमीन पर देखने को मिल जाता है.
पारंपरिक चिकित्सा में होता है इस्तेमाल
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र ने बताया कि छुईमुई का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता रहा है. इसकी पत्तियों, जड़ों और अन्य भागों का अलग-अलग तरह से प्रयोग किया जाता है. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. उन्होंने बताया कि पारंपरिक रूप से छुईमुई का प्रयोग घाव और खून बहने जैसी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. कुछ लोग इसकी पत्तियों को पीसकर लेप के रूप में इस्तेमाल करते हैं. ऐसी स्थिति में घाव पर साफ कपड़े या पट्टी से दबाव बनाना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
महिलाओं की समस्याओं में भी होता है पारंपरिक प्रयोग
वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र के अनुसार, पारंपरिक चिकित्सा में महिलाओं से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए भी लाजवंती का इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसमें मासिक धर्म से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया जाता है. पीसीओडी और पीसीओएस जैसी समस्याओं में भी कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका प्रयोग बताया जाता है. हालांकि, इन समस्याओं के इलाज में छुईमुई की प्रभावशीलता को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए महिलाओं को इन समस्याओं में खुद से किसी औषधीय पौधे का सेवन नहीं करना चाहिए. मासिक धर्म में अनियमितता या पीसीओडी, पीसीओएस और लिकोरिया के लक्षण होने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.
बिना सलाह के न करें इस्तेमाल
छुईमुई एक खास पहचान वाला पौधा है, जिसका पारंपरिक चिकित्सा में उल्लेख मिलता है. लेकिन प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि हर पौधा पूरी तरह सुरक्षित है. इसकी पत्तियों या जड़ों का सेवन करने अथवा किसी बीमारी में इस्तेमाल करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह जरूर लें. सही जानकारी और विशेषज्ञ की देखरेख में ही किसी औषधीय पौधे का इस्तेमाल करना चाहिए.
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