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Waste Recycling Unique Model: तेलंगाना के मोइनाबाद से शुरू हुई गुडीबैग की पहल देशभर में सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग तक पहुंचाने का नया मॉडल बन रही है. बिहार समेत कई राज्यों के लोग घरों में जमा सूखा कचरा कूरियर और डाक से गुडीबैग के सेंटर पर भेज रहे हैं. अभिषेक अग्रवाल ने वर्ष 2022 में लोगों को कचरा अलग करने के प्रति जागरूक करने के लिए एक व्हाट्सऐप ग्रुप से इसकी शुरुआत की थी. आज इस प्लेटफॉर्म से 30 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं और 18 लोगों की टीम इसे संचालित कर रही है. गुडीबैग सिर्फ सूखा कचरा लेता है. रोजाना 30 से 40 हजार किलो कचरा इकट्ठा किया जा रहा है. संस्था के मुताबिक, अब तक 25 लाख किलो से ज्यादा सूखा कचरा रीसायकल हो चुका है और इसके बदले लोगों को रिवार्ड भी दिया जाता है.
हैदराबाद: अक्सर लोग अपने घरों से निकलने वाले चिप्स-भुजिया के रैपर, ऑनलाइन डिलीवरी के प्लास्टिक डिब्बे और पुराने मोबाइल कवर को कूड़ेदान में फेंक देते हैं. लेकिन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. बिहार समेत देश के अलग-अलग राज्यों से लोग अपने घरों का सूखा कचरा कूरियर और डाक के जरिए तेलंगाना के मोइनाबाद स्थित वेस्ट मैनेजमेंट स्टार्टअप Goodeebag को भेज रहे हैं.
गुडीबैग के संस्थापक अभिषेक अग्रवाल के अनुसार इस मुहिम की शुरुआत साल 2022 में महज एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए हुई थी. उस समय मकसद सिर्फ इतना था कि लोगों को कचरा अलग करने के प्रति जागरूक किया जाए. आज यह पहल एक बड़े प्लेटफॉर्म का रूप ले चुकी है. गुडीबैग का अपना मोबाइल ऐप है और 18 लोग काम करत हैं. इन्हीं की वजह से अब तक 30 हजार से ज्यादा जागरूक लोग जुड़ चुके हैं.
सिर्फ सूखा कचरा लेना एक बड़ी चुनौती थी
अभिषेक अग्रवाल बताते हैं कि गुडीबैग केवल सूखा कचरा ही स्वीकार करता है. गीला कचरा बिल्कुल नहीं लिया जाता. शुरुआत में लोगों को सूखे और गीले कचरे के अंतर को समझाना और सिर्फ सूखा कचरा देने के लिए राजी करना काफी चुनौतीपूर्ण रहा. हालांकि, लगातार जागरूकता के बाद लोगों की सोच बदली और वे खुद कचरे को साफ करके अलग-अलग श्रेणियों में बांटने लगे.
2500 टन से अधिक सूखे कचरे को कर चुके हैं रीसायकल
गुडीबैग हर दिन गांवों और शहरों से 30 हजार से 40 हजार किलोग्राम तक सूखा कचरा इकट्ठा कर रहा है. इसमें मल्टी-लेयर प्लास्टिक, फूड कंटेनर, बबल रैप, एक्सपायर्ड दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट शामिल हैं. अभिषेक के मुताबिक, गुडीबैग की टीम अब तक 25 लाख किलोग्राम यानी 2500 टन से अधिक सूखे कचरे को सफलतापूर्वक रीसायकल कर चुकी है. जिससे इसे लैंडफिल में जाने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से बचाया जा सका.
करता के बदले रिवार्ड देता है Goodeebag
देश भर से लोग खुद के खर्च पर अपने सूखे कचरे को तेलंगाना के मोइनाबाद स्थित सेंटर पर पार्सल कर रहे हैं. इसके बदले Goodeebag रिवार्ड भी देता है. कचरा प्रबंधन की दिशा में यह मॉडल न सिर्फ प्लास्टिक प्रदूषण को कम कर रहा है बल्कि स्वच्छ भारत मिशन को भी जमीनी स्तर पर मजबूती दे रहा है.
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दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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