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Maize cultivation in Gonda: दिवांशु ने बताया कि स्कूल में कुछ बच्चे उन्हें खेती करने पर हंसते है और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह देते है. वहीं, कुछ लोग उनकी मेहनत की तारीफ भी करते है. उनका कहना है कि पढ़ाई के साथ खेती करना अच्छी बात है और इससे उन्हें खेती का अनुभव भी मिल रहा है. दिवांशु मौर्य ने बताया कि इस समय वह करीब 2 से 3 बीघे में मक्के की खेती कर रहे है. भविष्य में उनका इरादा खेती का रकबा और बढ़ाने का है.
गोंडा जिले में एक युवा छात्र पढ़ाई के साथ-साथ खेती-किसानी में भी हाथ आजमा रहा है. तरबगंज ब्लॉक के रहने वाले 8वीं कक्षा के छात्र दिवांशु मौर्य ने मक्के की खेती शुरू की है. उनकी फसल की अच्छी ग्रोथ देखकर उन्हें बेहतर पैदावार और अच्छी कमाई की उम्मीद है. लोकल 18 से बात करते हुए दिवांशु मौर्य ने बताया कि वह 8वीं कक्षा में पढ़ते है और पढ़ाई के साथ-साथ खेती में भी उनकी गहरी रुचि है. उन्होंने बताया कि उनके दादा और पिता भी मक्के की खेती करते थे. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब वह भी मक्के की खेती कर रहे है.
दिवांशु ने बताया कि स्कूल में कुछ बच्चे उन्हें खेती करने पर हंसते है और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह देते है. वहीं, कुछ लोग उनकी मेहनत की तारीफ भी करते है. उनका कहना है कि पढ़ाई के साथ खेती करना अच्छी बात है और इससे उन्हें खेती का अनुभव भी मिल रहा है. दिवांशु मौर्य ने बताया कि इस समय वह करीब 2 से 3 बीघे में मक्के की खेती कर रहे है. भविष्य में उनका इरादा खेती का रकबा और बढ़ाने का है.
उन्होंने बताया कि 3 बीघे में मक्के की खेती करने में उन्हें लगभग 5 से 7 हजार रुपये का खर्च आया है. दिवांशु के मुताबिक, एक बीघे में लगभग 3 से 4 क्विंटल मक्के की पैदावार हो जाती है. अगर मक्के को हरे रूप में बेचा जाए तो करीब 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल जाता है. वहीं, मक्के को सुखाकर दाना निकालकर बेचने पर लगभग 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलता है.
जैविक खाद का करते है अधिक प्रयोग
दिवांशु ने बताया कि वह मक्के की खेती में रासायनिक खाद का कम इस्तेमाल करते है और जैविक खाद का ज्यादा प्रयोग करते है. उनका कहना है कि इसी वजह से उनके मक्के की बाजार में अच्छी मांग रहती है. कई बार तो मक्का खेत से ही बिक जाता है.
खेती को आगे बढ़ाने की है योजना
गोंडा जिले में बड़ी संख्या में किसान खेती-किसानी से जुड़े हैं. यहां धान, गेहूं और अन्य फसलों के साथ मक्के की खेती भी की जाती है. दिवांशु मौर्य जैसे युवा पढ़ाई के साथ खेती में रुचि लेकर एक नई मिसाल पेश कर रहे है. उनका लक्ष्य भविष्य में मक्के की खेती का रकबा बढ़ाकर इससे अच्छी आमदनी करना है.
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Manish Rai is a digital journalist with over 8 years of experience in regional and digital media. He is currently associated with News18 as the Local18 Uttar Pradesh Coordinator, where he works on planning, coo…
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