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Nehru Talai Bhilwara: भीषण गर्मी के बीच भीलवाड़ा का नेहरू तलाई टापू पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बनकर उभरा है. जल और हरियाली से घिरा यह क्षेत्र बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों को आकर्षित कर रहा है. गर्म मौसम में जहां पक्षियों के लिए पानी और सुरक्षित ठिकाने की चुनौती बढ़ जाती है, वहीं नेहरू तलाई का टापू उन्हें अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा रहा है. यही वजह है कि यहां पक्षियों की चहचहाहट और उनकी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं. प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए यह स्थान तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. सुबह और शाम के समय यहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को देखा जा सकता है.
पक्षियों को मिला सुरक्षित ठिकाना!
भीलवाड़ा: इन दिनों जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और तेज धूप से जहां आमजन परेशान हैं, वहीं पक्षियों के लिए नेहरू तलाई के बीच स्थित एक छोटा सा टापू राहत का ठिकाना बना हुआ है. शहर का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बावजूद यह टापू पक्षियों को ठंडक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करा रहा है. पानी से चारों ओर घिरे होने और घने पेड़ों की मौजूदगी के कारण यहां का माहौल अपेक्षाकृत ठंडा बना रहता है, जिससे बड़ी संख्या में पक्षी यहां अपना बसेरा बनाए हुए हैं. सुबह सूरज निकलने के साथ ही टापू पर पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देने लगती है. विभिन्न प्रजातियों के पक्षी पेड़ों की शाखाओं पर बैठकर कलरव करते नजर आते हैं. दिनभर उनकी आवाजें वातावरण को जीवंत बनाए रखती हैं. शाम के समय भी यहां पक्षियों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है.
शहर में तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल और हरियाली की कमी के बीच यह टापू पक्षियों के लिए प्राकृतिक आश्रय स्थल का काम कर रहा है. यहां मौजूद घने पेड़ उन्हें तेज धूप से बचाने के साथ-साथ आराम करने और घोंसले बनाने के लिए भी उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराते हैं. पानी की उपलब्धता के कारण पक्षियों को भोजन और जीवन के लिए आवश्यक अनुकूल वातावरण भी मिल जाता है. दूर से देखने पर यह दृश्य बेहद मनमोहक नजर आता है. पेड़ों की ऊंची शाखाओं पर बड़ी संख्या में बैठे सफेद पक्षी ऐसे दिखाई देते हैं, मानो पेड़ों पर सफेद फूल खिल गए हों. यह नजारा लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है और कई लोग इसे कैमरे में कैद करने के लिए भी यहां पहुंचते हैं.
प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
भीलवाड़ा के रहने वाले अमन कुमार ने बताया कि शहरों में ऐसे प्राकृतिक स्थानों का संरक्षण बेहद जरूरी है. बढ़ती गर्मी और घटती हरियाली के बीच पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाने कम होते जा रहे हैं. ऐसे में नेहरू तलाई का यह टापू न केवल पक्षियों को जीवनदायिनी शरण दे रहा है, बल्कि लोगों को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है. भीषण गर्मी के इस दौर में यह छोटा सा टापू पक्षियों के लिए किसी प्राकृतिक स्वर्ग से कम नहीं है.
अनेक प्रजातियों के पक्षी आते हैं यहां
नेहरू तलाई में मुख्य रूप से विसलिंग डक, नोब्ड बिल्ड डक, नार्दन शावलर, यूरेशियन मोरहेन, यूरेशियन कूट, ग्रे हेडेड स्वाम्पहेन, वाइट हेडेड वाटर हेन, गजपांव, रफ, जांघिल, पनकौआ, करिछ्या बगुला, पॉन्ड हेरोन, ब्लेक क्राउन्ड नाइट हेरोन, ग्लोसी आइबिस, शिकरा, धनेश, किलकिला, काॅपर स्मिथ बारबेट, काला कोतवाल, हाउस क्रो, पर्पल सनबर्ड, हाउस स्पैरो सहित प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की प्रजातियां यहां पाई जाती हैं.
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