कानपुरः नगर निगम में करोड़ों रुपये के टेंडर को लेकर चल रहा खेल अब जांच के घेरे में आ गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद नगर निगम की ठेकेदारी व्यवस्था की परतें खुलने लगी हैं. शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर निरस्त किए जा चुके हैं. सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और छह मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. दो ठेकेदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि पूरे सिंडिकेट का कथित सरगना गोविंद शर्मा फरार है.
15 फीसदी नीचे रेट डालने का खेल
जांच में टेंडर हासिल करने के तरीके को लेकर भी चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. पुलिस के मुताबिक, ठेकेदारों का एक सिंडिकेट सक्रिय था. आरोप है कि इसी सिंडिकेट के जरिए तय किया जाता था कि किस काम का टेंडर कौन डालेगा और किस फर्म को काम मिलेगा. कई मामलों में करीब 15 फीसदी कम रेट पर टेंडर डलवाने और फिर तय फर्म को काम दिलाने का खेल होने की बात सामने आई है. पुलिस के अनुसार, कुछ ठेकेदारों पर दबाव बनाया जाता था और दूसरे लोगों को टेंडर प्रक्रिया से दूर रखने की कोशिश होती थी. जांच में लकी ड्रॉ के नाम पर टेंडर मैनेज किए जाने की बात भी सामने आई है. हालांकि इन आरोपों की पूरी सच्चाई एसआईटी की जांच के बाद ही साफ होगी.
100 करोड़ के टेंडर रद्द, भुगतान पर भी रोक
मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त कर दिए हैं. विकास कार्यों से जुड़े भुगतान पर भी रोक लगाई गई है. नई फर्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है. नगर निगम अब लंबित और नए कामों के लिए ऑनलाइन ई-टेंडरिंग की व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है. जांच के दायरे में वे फर्में हैं जिनके जरिए नगर निगम के बड़े काम लिए गए. पुलिस ने दिलीप बाजपेई, अजय इंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज समेत फर्मों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं. जगदंबा इंटरप्राइजेज के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हुए हैं.
अब अफसरों की भूमिका भी जांच के घेरे में
एसआईटी अब सिर्फ ठेकेदारों तक सीमित नहीं है. नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांची जा रही है. टीम ने टेंडर, भुगतान, फर्म पंजीकरण और विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें मांगी हैं. नगर निगम में अधिकारियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि अगर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही थी तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई. एसआईटी प्रभारी एडीसीपी डॉ. अर्चना सिंह ने कहा कि जिन फर्मों की जांच होनी है, उनकी फाइलें मांगी गई हैं. फाइलों का अध्ययन किया जा रहा है. एक फर्म के दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ियां भी मिली हैं. जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी से खुल सकते बड़े राज
पुलिस के मुताबिक, आगरा निवासी गोविंद शर्मा इस पूरे नेटवर्क का कथित सरगना है. उसकी फर्म को बड़ी संख्या में नगर निगम के काम मिलने की बात सामने आई है. पुलिस ने दो ठेकेदारों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गोविंद शर्मा की तलाश जारी है. पुलिस का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद टेंडर सिंडिकेट से जुड़े कई और राज खुल सकते हैं. अब एसआईटी की जांच का फोकस इस बात पर है कि करोड़ों रुपये के टेंडर में गड़बड़ी किस स्तर तक हुई, किन लोगों ने फर्मों को फायदा पहुंचाया और क्या इसमें नगर निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत थी. जांच पूरी होने के बाद तस्वीर और साफ होगी.

