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Sugar Production : पहले आशंका जताई जा रही थी कि चीनी मिलों की संख्या घटने से इस साल चीनी का उत्पादन भी कम रहेगा, लेकिन अब इस्मा ने बताया है पिछले साल से ज्यादा उत्पादन होगा. साथ ही एथनॉल का उत्पादन भी बढ़ेगा, जिससे आयात बिल में अरबों डॉलर की कमी आ सकती है.

देश में चीनी का उत्पादन 7 फीसदी बढ़ने का अनुमान है.
नई दिल्ली. भारत की चीनी मिलों ने उन आशंकाओं को खत्म कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि इस साल चीनी उत्पादन कम रहेगा. चीनी उद्योग के संगठन इस्मा ने बताया है कि भारत में 2025-26 विपणन सत्र में अब तक चीनी उत्पादन 7.32 फीसदी बढ़कर 2.752 करोड़ टन रहा है. पिछले वर्ष की समान अवधि (30 अप्रैल तक) में यह उत्पादन 2.564 करोड़ टन था. आपको बता दें कि चीनी विपणन सत्र अक्टूबर से सितंबर तक चलता है. इसके साथ ही एथनॉल उत्पादन के आंकड़ों में भी सुधार दिख रहा है, जिसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा और आयात बिल में अरबों डॉलर की बचत होगी.
इस्मा के अनुसार, देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन 80.9 लाख टन से बढ़कर 99.2 लाख टन हो गया जबकि कर्नाटक में यह 40.4 लाख टन से बढ़कर 48 लाख टन पहुंच गया. उत्तर प्रदेश में उत्पादन हालांकि घटकर 89.6 लाख टन रह गया जो एक साल पहले समान अवधि में 92.4 लाख टन था. संगठन ने 2025-26 विपणन सत्र के लिए ‘एथनॉल डायवर्जन’ के बाद कुल चीनी उत्पादन 2.93 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है जो 2024-25 में दर्ज 2.612 करोड़ टन से अधिक है.
एथनॉल का बंपर उत्पादन
‘एथनॉल डायवर्जन’ से तात्पर्य गन्ने के रस या चीनी के शीरे या बी-हैवी मोलासेस को चीनी बनाने के बजाय एथनॉल बनाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल करना है. पेराई गतिविधि अब लगभग समाप्त हो चुकी है और केवल पांच चीनी मिल ही चालू हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समय 19 मिल काम कर रही थीं. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की सभी मिल मुख्य सत्र के लिए बंद हो चुकी हैं. हालांकि, कर्नाटक की कुछ इकाइयां जून-जुलाई 2026 में विशेष सत्र में काम करेंगी.
तमिलनाडु में कितना उत्पादन
तमिलनाडु में भी कुछ मिल विशेष सत्र के दौरान संचालित होंगी और ऐतिहासिक रूप से ये दोनों राज्य इस अवधि में लगभग पांच लाख टन उत्पादन करते हैं. सत्र के समापन के करीब पहुंचने के साथ उद्योग ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में शीघ्र संशोधन की मांग की है. उद्योग का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और मिल स्तर पर कम प्राप्तियों से नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ रहा है जिससे गन्ना भुगतान बकाया बढ़ रहा है.
महाराष्ट्र में बढ़ गया बकाया
केवल महाराष्ट्र में ही अप्रैल मध्य तक गन्ना भुगतान बकाया 2,130 करोड़ रुपये पहुंच गया जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 752 करोड़ रुपये से लगभग तीन गुना है. उद्योग ने सरकार से एथनॉल मिश्रण लक्ष्य को मौजूदा ई20 कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर ई25 और ई85/ई100 जैसे उच्च स्तर तक ले जाने का भी आग्रह किया है. इसके साथ ही ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ वाहनों के तेजी से विस्तार और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों के युक्तिकरण की मांग की गई है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

