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Ministry of Urban Development-सड़क किनारे बने टॉयलेट एयरपोर्ट जैसे होंगे. वहां से बदबू नहीं भीनी-भीनी खुशबू आएगी. जैसे बड़े होटलों से आती है. इसके लिए शहरी विकास मंत्रालय ने बड़ा फैसला किया गया है. जल्द ही काम शुरू हो जाएगा.
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री ने किया ऐलान.नई दिल्ली. सफर या बाजार में खरीदारी के दौरान जरूरत पड़ने पर कई लोग सार्वजनिक टॉयलेट जाने से बचते हैं. इसकी बड़ी यहां पर गंदगी या उठने वाली दुर्गंध होती है, लेकिन जल्द ही लोगों की यह शिकायत दूर होने वाली है. सड़क किनारे बने टॉयलेट एयरपोर्ट जैसे होंगे. वहां से बदबू नहीं भीनी-भीनी खुशबू आएगी. जैसे बड़े होटलों से आती है. इसके लिए शहरी विकास मंत्रालय ने बड़ा फैसला किया गया है.
मंत्रालय ने देशभर में 29000 टॉयलेट बनाने का फैसला किया है, जो 23 राज्यों में बनेंगे. इसका काम जल्द ही शुरू होने जा रहा है. इसकी घोषणा केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की है. ये टॉलयेट आधुनिक होंगे, जिसमें एनर्जी बचाने से लेकर बेहर सुविधा देने की कोशिश की जाएगी. बताया जा रहा है कि ये टॉयलेट एयरपोर्ट से कमजोर नहीं होंगे. जिससे लोग इनको बेधड़क होकर इस्तेमाल कर सकें. इनकी साफ सफाई पर खास दिया जाएगा.
ये टॉयलेट सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में बनेंगे. यहां पर 5300 से अधिक टॅायलेट बनेंगे इसके अलावा दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र में 4700 के करीब और तीसरे नंबर पर गुजरात 2800 के करीब बनाए जाएंगे.
ये शौचालय स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बने, जिनमें ट्विन-पिट तकनीक का उपयोग करके बनाए जाएंगे, जो कम पानी में सुरक्षित सेप्टेज प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे. ये टिकाऊ, कम लागत वाले और महिलाओं-बच्चियों की सुरक्षा व गरिमा को ध्यान में रखकर बनाए गए
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ की 2024 ज्वाइंट मॉनिटरिंग प्रोग्राम रिपोर्ट के अनुसार पिछले केवल दो सालों में भारत के शहरी क्षेत्रों में लगभग 5.5 करोड़ (55 मिलियन) नागरिकों को सुविधा उपलब्ध कराई गयी है. यह आबादी लगभग फ्रांस या इटली की कुल जनसंख्या के बराबर है. इन बेहतर स्वच्छता सेवाओं ने शिशु मृत्यु दर तथा पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को काफी हद तक कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
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