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Govt. Rule on Drones: सरकार ने ड्रोन हादसों को कम करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं. अब 250 ग्राम से भारी ड्रोन केवल सरकारी सर्टिफिकेट पास होने पर ही उड़ेंगे.
सरकार ने ड्रोन उड़ान के लिए सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य किया. देश में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही कई हादसे भी हो रहे हैं. इन्हें देखते हुए सरकार ने ड्रोन उड़ाने के नियम सख्त कर दिए हैं. अब 250 ग्राम से भारी हर ड्रोन को उड़ाने से पहले सरकारी सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा. इसका मतलब है कि बिना जांच-पड़ताल पास किए कोई ड्रोन उड़ नहीं पाएगा.
सरकार ने ड्रोन की जांच के लिए गाज़ियाबाद में नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) में 20 करोड़ की लागत से नई लैब बनाई है. यहां हर ड्रोन को अलग-अलग हालात में परखा जाएगा. सिर्फ वही ड्रोन उड़ान भर पाएंगे, जो पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद हों. इस लैब से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाजार में सिर्फ अच्छे और सुरक्षित ड्रोन ही उपलब्ध हों.
ड्रोन टेस्ट का तरीका
NTH के महानिदेशक आलोक श्रीवास्तव कहते हैं कि किसी भी ड्रोन की जांच में करीब 20 दिन लगते हैं. इस दौरान ड्रोन को झटके, गर्मी, ठंड, नमी, धूल और इलेक्ट्रॉनिक दखलअंदाजी जैसी चीज़ों में परखा जाता है. अगर ड्रोन पास हो जाता है तो सर्टिफिकेट मिल जाता है. अगर ड्रोन फेल होता है तो कंपनी को सुधार करने का मौका दिया जाता है और दोबारा आवेदन कर सकती है.
ड्रोन को उड़ाने से पहले ये सात बड़े टेस्ट पास करने जरूरी हैं:
- शॉक टेस्ट – लैंडिंग और झटके सहने की ताकत
- टेम्परेचर टेस्ट – -40 से 140 डिग्री तक काम कर सके
- ह्यूमिडिटी टेस्ट – नमी में उड़ान की ताक
- डस्ट टेस्ट – धूल भरे मौसम में उड़ान की मजबूती
- वॉटरिंग टेस्ट – पानी और नमी से सुरक्षा
- बैटरी टेस्ट – बैटरी की सुरक्षा और टिकाऊपन
- EMI/EMC टेस्ट – इलेक्ट्रॉनिक दखलअंदाजी सहने की क्षमता
अब तक सिर्फ 2 ड्रोन पास हुए
अब तक 50 से ज्यादा ड्रोन टेस्टिंग के लिए आए, लेकिन इनमें से सिर्फ 2 ही पास हो पाए. बाकी ड्रोन सुरक्षा और गुणवत्ता में कमजोर पाए गए. इसका मतलब है कि बाजार में अब भी ज्यादातर ड्रोन पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं.
सरकार का संदेश
सरकार ने साफ कर दिया है कि अब ड्रोन केवल तभी उड़ेंगे जब वह सुरक्षित और भरोसेमंद हों. कंपनियों को अपनी गुणवत्ता सुधारनी होगी. इस कदम से ड्रोन इंडस्ट्री में सुरक्षा बढ़ेगी और लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा.

